विधाननगर अस्पताल का नाम बदला, मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल
'बंगाल में बाहरी पर्यटन से नहीं बदलेगा जनादेश'
कोलकाता। बंगाल के चुनावी रण में शह-मात का खेल अब व्यक्तिगत वार-पलटवार तक पहुँच गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा चुनाव के दौरान राज्य में लगातार 15 दिनों तक डेरा डालने के ऐलान पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा तंज कसा है। ममता ने शाह के इस कदम को राजनीतिक हताशा करार देते हुए कहा कि बंगाल की जनता पर्यटकों और जनप्रतिनिधियों के बीच का अंतर बखूबी जानती है।
मुख्यमंत्री के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस इस बार भी भाजपा के आक्रामक प्रचार को बाहरी बनाम स्थानीय के भावनात्मक मुद्दे से घेरने की तैयारी में है। ममता बनर्जी के तंज के साथ ही तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर एक अनोखा अभियान छेड़ दिया है। पार्टी ने शाह के 15 दिवसीय दौरे का स्वागत पर्यटक के रूप में करते हुए उन्हें बंगाल के प्रसिद्ध मांसाहारी व्यंजनों जैसे मुड़ी घन्टो, पाबदा माछेर झाल और कोशा मांग्शो चखने की सलाह दी है। यह हमला दरअसल उन चर्चाओं के बीच आया है जिसमें भाजपा पर खान-पान की आदतों को नियंत्रित करने के आरोप लगाए जा रहे थे।
ममता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई कितने भी दिन यहाँ क्यों न रुक जाए, बंगाल की संस्कृति और विकास के प्रति जनता का भरोसा डिगाना नामुमकिन है। मुख्यमंत्री ने मालदा के कालियाचक की हालिया घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि यह चुनाव रद्द कराने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने सीधे तौर पर अमित शाह को निशाने पर लेते हुए कहा कि राज्य में भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था का बहाना बनाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित किया जा सके। ममता ने अपने कार्यकर्ताओं को उकसावे में न आने की सलाह देते हुए कहा कि भाजपा की यह सक्रियता केवल माहौल बनाने की कोशिश है, क्योंकि उन्हें अपनी हार का आभास हो गया है। अमित शाह की योजना 15 दिनों तक बंगाल में रहकर हर बूथ की कमान खुद संभालने की है, जिसे भाजपा अपनी जीत का ब्रह्मास्त्र मान रही है। वहीं, ममता बनर्जी इसे भाजपा के घटते आत्मविश्वास का प्रतीक बता रही हैं।
चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि जहाँ भाजपा शाह के प्रवास से संगठन में नई जान फूंकना चाहती है, वहीं ममता इसे बाहरी हस्तक्षेप के रूप में पेश कर बंगाली अस्मिता का कार्ड खेल रही हैं। अब 23 और 29 अप्रैल को होने वाला मतदान ही तय करेगा कि शाह का 15 दिन का प्रवास भाजपा के लिए प्रसाद बनेगा या ममता का तंज सत्ता की कुर्सी बचाए रखेगा।