Please wait
शादी के बंधन में बंधे आमिर खान और गौरी स्प्रैट Sudhir wins historic बंगाल में भारी बारिश का अलर्ट, तटीय जिलों में प्रशासन सतर्क Sudhir wins historic तृणमूल प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य ने ऋतब्रत बनर्जी गुट के नेताओं से की मुलाकात, अटकलें तेज Sudhir wins historic वैभव सूर्यवंशी ने डेब्यू करते ही रचा इतिहास, तोड़ा सचिन तेंदुलकर का 37 साल पुराना महारिकॉर्ड Sudhir wins historic राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों को मिले कठोर दंडः संघ Sudhir wins historic डायमंड हार्बर में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नया मामला, ‘सेवाश्रय’ शिविर जांच के घेरे में Sudhir wins historic विपक्षी विधायकों को मिलेगा समान सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकार, विधानसभा में बोले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी Sudhir wins historic तृणमूल के तीन बैंक खातों पर रोक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, बैंक से हलफनामा और पुलिस से जांच रिपोर्ट तलब Sudhir wins historic बंगाल की खाड़ी में बन रहा गहरा निम्न दबाव, चार से आठ जुलाई तक दक्षिण बंगाल में भारी बारिश की चेतावनी Sudhir wins historic विधाननगर अस्पताल का नाम बदला, मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल Sudhir wins historic

ममता का 'शहरी कार्ड', राज्यसभा की राह से 2026 की किलेबंदी

वहीं, बाबुल सुप्रियो का चयन एक अनुभवी राजनेता को पुरस्कृत करने और उनके दिल्ली के पुराने अनुभवों को भुनाने की कोशिश है

28 Feb 2026

ममता का 'शहरी कार्ड', राज्यसभा की राह से 2026 की किलेबंदी

कोलकाता। बंगाल की राजनीति में माटी-मानुष का नारा बुलंद करने वाली तृणमूल अब महानगर और मध्यवर्ग की ओर कदम बढ़ाती दिख रही है। राज्यसभा चुनावों के लिए घोषित उम्मीदवारों की हालिया सूची केवल नामों का संग्रह नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस गहरी राजनीतिक बिसात का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2026 के विधानसभा चुनाव हैं। पार्टी ने इस बार अपने पारंपरिक सामाजिक समीकरणों अल्पसंख्यक, आदिवासी और ग्रामीण प्रतिनिधित्व से इतर एक ऐसी सूची पेश की है जो पूरी तरह से शहरी, शिक्षित और प्रबुद्ध वर्ग को समर्पित नजर आती है। सियासी गलियारों में इस बदलाव को ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की उस सोची-समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य हालिया लोकसभा चुनावों और नगर निकाय परिणामों में शहरी क्षेत्रों में लगी सेंध की भरपाई करना है। बंगाल के 76 नगर निकायों में तृणमूल को मिले झटकों ने नेतृत्व को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि केवल ग्रामीण जनाधार के भरोसे 2026 की वैतरणी पार करना जोखिम भरा हो सकता है। इस सूची में सबसे चौंकाने वाला और ग्लैमरस नाम अभिनेत्री कोयल मलिक का है। टॉलीवुड की क्वीन मानी जाने वाली कोयल न केवल एक स्थापित अभिनेत्री हैं, बल्कि उनका पारिवारिक कद भी काफी ऊंचा है। उनके पिता रंजीत मलिक की छवि एक साफ-सुथरे और सम्मानित अभिनेता की रही है। कोयल के जरिए ममता बनर्जी बंगाल के उस भद्रलोक और मध्यवर्गीय बंगाली परिवार तक अपनी पहुंच बनाना चाहती हैं, जो अक्सर ग्लैमर के साथ-साथ बौद्धिकता को प्राथमिकता देता है। कोयल की हिंदी, अंग्रेजी और बांग्ला पर समान पकड़ उन्हें दिल्ली के गलियारों में पार्टी का एक प्रभावी चेहरा बनाएगी। 
वहीं, बाबुल सुप्रियो का चयन एक अनुभवी राजनेता को पुरस्कृत करने और उनके दिल्ली के पुराने अनुभवों को भुनाने की कोशिश है। भाजपा से आए बाबुल सुप्रियो के पास केंद्रीय मंत्री और सांसद के रूप में काम करने का लंबा अनुभव है। पार्टी को लगता है कि संसद के उच्च सदन में बाबुल जैसे मुखर नेता की उपस्थिति राष्ट्रीय स्तर पर तृणमूल के पक्ष को मजबूती से रखेगी। प्रशासनिक हल्के से राजीव कुमार की एंट्री ने सबको हैरान कर दिया है। पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, जो एक समय मुख्यमंत्री के बेहद करीबी अधिकारियों में गिने जाते थे, बीच में कुछ समय के लिए हाशिए पर नजर आए थे लेकिन उन्हें राज्यसभा भेजकर ममता ने दो टूक संदेश दिया है कि वे अपने वफादारों के साथ खड़ी रहती हैं। राजीव कुमार का चयन न केवल उन्हें राजनीतिक सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पार्टी को उनकी रणनीतिक और प्रशासनिक समझ पर अब भी पूरा भरोसा है। राष्ट्रीय राजधानी की एलीट राजनीति में पैठ बनाने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी का नाम एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। अब तक तृणमूल दिल्ली में कपिल सिब्बल जैसे बाहरी दिग्गजों पर निर्भर रहती थी, लेकिन मेनका के जरिए ममता बनर्जी ने खुद का एक ऐसा चेहरा तैयार किया है जो दिल्ली के बौद्धिक, कानूनी और रसूखदार तबके में गहरी पैठ रखता है। 
इंडिया गठबंधन में अपनी भूमिका को विस्तार देने के लिए ममता को एक ऐसे सेतु की आवश्यकता थी जो दिल्ली के प्रभावशली समाज की भाषा बोल सके। कुल मिलाकर, तृणमूल की यह नई टीम बंगाल के शहरों में पनप रही नाराजगी को कम करने और एक प्रोग्रेसिव छवि गढऩे की कोशिश है। यदि यह दांव सफल रहता है, तो 2026 में भाजपा के शहरी वोट बैंक में सेंध लगाना ममता के लिए आसान हो जाएगा। 

Ad Image
Comments

No comments to show. Log in to add some!

Other Relevant Stories


ममता का 'शहरी कार्ड', राज्यसभा की राह से 2026 की किलेबंदी
वहीं, बाबुल सुप्रियो का चयन एक अनुभवी राजनेता को पुरस्कृत करने और उनके दिल्ली के पुराने अनुभवों को भुनाने की कोशिश है





Download The Taaza Tv App Now to Stay Updated on the Latest News!


play store download
app store download
app img


Breaking News