विधाननगर अस्पताल का नाम बदला, मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल
प्रशासन अब चुनाव आयोग और केंद्र के इशारों पर नाच रहा है
कोलकाता। मालदा में न्यायिक अधिकारियों को सात घंटे तक बंधक बनाए जाने की सनसनीखेज घटना ने बंगाल की सियासत में उबाल ला दिया है। इस तांडव पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि अराजकता और हिंसा तृणमूल की संस्कृति नहीं है। मालदा की धरती से हुंकार भरते हुए उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया और चेतावनी दी कि जजों को घेरने वाले दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे किसी भी दल के क्यों न हों।
मुख्यमंत्री ने भीड़ द्वारा जजों को बंधक बनाए जाने की घटना को अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम कटने पर गुस्सा होना स्वाभाविक है और इसके लिए वे खुद सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी थीं, जिसके बाद 22 लाख नाम दोबारा जुड़े। ममता ने कड़े शब्दों में सवाल किया, जब अदालत का फैसला आ चुका था, तो जजों को बंधक बनाने की क्या तुक थी? उन्होंने आगाह किया कि ऐसी बचकानी और हिंसक हरकतों से केंद्रीय एजेंसियों को घुसने का मौका मिलता है, जिसका खामियाजा निर्दोष युवाओं को जेल जाकर भुगतना पड़ेगा। ममता बनर्जी ने इस दौरान एक बड़ा संवैधानिक सवाल भी खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय राज्य की कानून-व्यवस्था अब उनके हाथ में नहीं रही।
उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मुख्य सचिव और डीजीपी ने मुझे इस घटना की जानकारी तक नहीं दी। प्रशासन अब चुनाव आयोग और केंद्र के इशारों पर नाच रहा है। उन्होंने कांग्रेस, सीपीएम और बीजेपी को एक ही सिक्के के दो पहलू बताते हुए इन्हें अपवित्र गठबंधन करार दिया, जो बंगाल को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। आगामी चुनाव को लेकर ममता ने खेला होबे के नारे को नया आयाम दिया। उन्होंने दावा किया कि इस बार का मुकाबला और भी जबरदस्त होगा और बंगाल की मिट्टी से बीजेपी, कांग्रेस और गद्दारों का सूपड़ा साफ कर दिया जाएगा। उन्होंने इसे केवल बंगाल की नहीं, बल्कि दिल्ली की गद्दी से बीजेपी को हटाने की शुरुआत बताया। भावुक अपील करते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल को धर्म और जाति के नाम पर बांटने वाली ताकतों से सावधान रहने की जरूरत है। राजनीतिक हमलों के बीच ममता ने विकास का एजेंडा भी सामने रखा। उन्होंने कच्चे घरों को पक्का करने, हर घर जल और दुआरे स्वास्थ्य जैसी योजनाओं के विस्तार का भरोसा दिलाया। मालदा के आम, रेशम और ड्रैगन फ्रूट उत्पादन का जिक्र करते हुए उन्होंने इस क्षेत्र को उत्तर बंगाल के विकास का इंजन बताया।
मुख्यमंत्री का संदेश साफ था कि वे चुनावी मैदान में आक्रामकता तो दिखाएंगी, लेकिन कानून को हाथ में लेने वालों के लिए उनके पास कोई जगह नहीं है। उन्होंने स्थानीय उम्मीदवार चंदना सरकार के पक्ष में मतदान की अपील करते हुए लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी उकसावे में न आने की गुजारिश की। मालदा की इस सभा ने साफ कर दिया है कि 2026 की चुनावी जंग अब केवल वोटों की नहीं, बल्कि साख और अस्मिता की लड़ाई बन चुकी है।