मुख्यमंत्री के इस कदम से दिल्ली में सियासी पारा चढऩा तय माना जा रहा है
कोलकाता। एसआईआर को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ दी है। आगामी एक फरवरी को अपने दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री एक बड़ा राजनीतिक दांव खेलने जा रही हैं। वे दक्षिण दिनाजपुर के उन दो मृतकों के परिजनों को अपने साथ दिल्ली ले जाएंगी, जिनकी मौत का कारण कथित तौर पर एसआईआर प्रक्रिया से उत्पन्न तनाव और डर को बताया जा रहा है। तृणमूल के सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री इन परिवारों को सीधे चुनाव आयोग के समक्ष पेश करेंगी। ममता बनर्जी का आरोप है कि चुनाव आयोग की हठधर्मिता और त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया के कारण राज्य में अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज में एक बुजुर्ग महिला ने मतदाता सूची में नाम की गड़बड़ी के चलते कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी, वहीं तपन ब्लॉक के एक व्यक्ति की सुनवाई के दौरान तबीयत बिगडऩे से मौत हो गई थी। इन दोनों परिवारों को लेकर तृणमूल नेतृत्व पहले ही दिल्ली पहुंच चुका है। सिंगूर की सभा से चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए ममता बनर्जी ने कहा था कि वे इस अलोकतांत्रिक प्रक्रिया को बर्दाश्त नहीं करेंगी। उनके इस अभियान को समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव का भी समर्थन मिला है, जिन्होंने एसआईआर को व्हाइट कॉलर एनआरसी करार दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान दिल्ली में मृतकों के परिजनों की मौजूदगी से मुख्यमंत्री इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर गर्माना चाहती हैं। वे यह संदेश देना चाहती हैं कि मतदाता सूची में सुधार के नाम पर बंगाल के वैध नागरिकों को प्रताडि़त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के इस कदम से दिल्ली में सियासी पारा चढऩा तय माना जा रहा है।