बीरभूम के मयूरेश्वर से होगा दक्षिण बंगाल के चुनावी अभियान का शंखनाद
कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव के महाकुंभ में तृणमूल अपनी पूरी ताकत झोंकने को तैयार है। पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने रणनीतिक कौशल का परिचय देते हुए दक्षिण बंगाल में चुनावी अभियान की शुरुआत के लिए अपने सबसे मजबूत किले बीरभूम को चुना है। अनुब्रत मंडल के प्रभाव के कारण केष्टगढ़ के नाम से चर्चित इस जिले से ममता बनर्जी 26 मार्च को चुनावी बिगुल फूंकेंगी। उत्तर बंगाल के साथ-साथ दक्षिण बंगाल में समानांतर रूप से प्रचार तेज करने की इस योजना ने राज्य का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
दरअसल विधानसभा चुनाव के महासमर में उतरीं ममता के धुआंधार प्रचार अभियान मंगलवार को अलीपुरद्वार के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड से होने वाले चुनावी शंखनाद को खराब मौसम और भारी बारिश की आशंका के चलते स्थगित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री का यह दौरा न केवल अलीपुरद्वार बल्कि उत्तर बंगाल के मयनागुड़ी और माटीगाड़ा में भी जनसभाओं के जरिए कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए निर्धारित था। अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार साउ और तृणमूल के जिला अध्यक्ष गंगाप्रसाद शर्मा ने कार्यक्रम के टलने की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रतिकूल मौसम में सुरक्षा और अन्य प्रबंधों को देखते हुए फिलहाल 24 मार्च की सभी सभाएं रद्द की गई हैं।
राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे इस दौरे के लिए तृणमूल ने व्यापक स्तर पर तैयारियां की थीं। उत्तर बंगाल, जो पिछले कुछ चुनावों से भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है, वहां से अभियान की शुरुआत कर ममता बनर्जी एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में थीं। परेड ग्राउंड में होने वाली इस विशाल रैली को लेकर स्थानीय स्तर पर भारी उत्साह देखा जा रहा था, लेकिन अचानक बिगड़े मौसम ने आयोजकों और समर्थकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 26 मार्च को बीरभूम के मयूरेश्वर विधानसभा क्षेत्र में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगी। इस हाई-प्रोफाइल रैली को सफल बनाने के लिए तृणमूल कांग्रेस के संगठन और जिला प्रशासन ने दिन-रात एक कर दिया है। बीरभूम हमेशा से तृणमूल का अभेद्य दुर्ग रहा है, ऐसे में यहाँ से दिया गया संदेश पूरे दक्षिण बंगाल की सीटों पर गहरा मनोवैज्ञानिक असर डाल सकता है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जनसभा के भव्य आयोजन के लिए मयूरेश्वर-2 ब्लॉक में दो प्रमुख स्थानों को चिन्हित किया गया है। इनमें पहला स्थान कुंडला ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला कोटासुर उच्च विद्यालय का फुटबॉल मैदान है, जबकि दूसरा विकल्प ढेका ग्राम पंचायत के लोकपाड़ा कॉलेज का मैदान है। रविवार को रामपुरहाट महकमा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने दोनों ही संभावित स्थलों का सघन निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सुरक्षा घेरा, भीड़ प्रबंधन की क्षमता और वीवीआईपी आवागमन की सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया है। हालांकि, अंतिम फैसला सुरक्षा एजेंसियों और पार्टी नेतृत्व की हरी झंडी के बाद ही लिया जाएगा कि रैली वास्तव में किस मैदान में होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का बीरभूम से अभियान शुरू करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। एक ओर जहां भाजपा कोलकाता और उसके आसपास के क्षेत्रों में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं ममता बनर्जी अपने पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट करने के लिए बीरभूम जैसे ग्रामीण गढ़ों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
मयूरेश्वर की इस जनसभा के जरिए मुख्यमंत्री न केवल अपने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेंगी, बल्कि विपक्षी दलों को भी अपनी जमीनी ताकत का अहसास कराएंगी। आने वाले 26 मार्च को बीरभूम की धरती से निकलने वाली चुनावी गूंज बंगाल की सत्ता की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।