हुमायूं कबीर 'गो बैक' के नारों के बीच सुरक्षाकर्मियों ने निकाला बाहर
कोलकाता। बंगाल की राजनीति में अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले भरतपुर के विधायक व जनता विकास पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर को बुधवार को खिदिरपुर इलाके में जबरदस्त जन-आक्रोश का सामना करना पड़ा। एकबालपुर स्थित प्रसिद्ध सोलह आना मस्जिद के पास पहुँचते ही स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और गो बैक के नारों से पूरा इलाका गूँज उठा। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि उनके निजी सुरक्षाकर्मियों को कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ के बीच से सुरक्षित रास्ता बनाकर उन्हें बाहर निकालना पड़ा। इस घटना के राजनीतिक मायने काफी गहरे माने जा रहे हैं। हुमायूं कबीर, जो कभी तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता थे और अब अपनी अलग राजनीतिक राह चुन चुके हैं, पिछले कुछ समय से अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में अपनी पैठ जमाने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खिदिरपुर में हुआ यह विरोध केवल स्थानीय नाराजगी नहीं, बल्कि बंगाल के अल्पसंख्यक वोट बैंक पर कब्जे की वर्चस्व वाली जंग का हिस्सा है। हुमायूं ने इस हमले का सीधा आरोप तृणमूल कांग्रेस पर मढ़ते हुए कहा कि सत्ता पक्ष उनकी बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर भाड़े के प्रदर्शनकारियों का सहारा ले रहा है। दिलचस्प बात यह है कि हुमायूं कबीर ने खुद इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसे एक शक्ति प्रदर्शन और सहानुभूति बटोरने के दांव के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, वीडियो में किसी भी राजनीतिक दल का झंडा न होना इस ओर इशारा करता है कि शायद स्थानीय नागरिक समाज उनके हालिया सांप्रदायिक या विवादित बयानों से असहमत है। गौरतलब है कि इससे पहले 5 जनवरी को ब्रिगेड परेड ग्राउंड के निरीक्षण के दौरान भी उन्हें इसी तरह के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था। सियासी गलियारों में चर्चा है कि हुमायूं कबीर का मुस्लिम कार्ड और हाल ही में सीपीएम-कांग्रेस के साथ गठबंधन की कोशिशों ने तृणमूल कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं को चौकन्ना कर दिया है।
खिदिरपुर जैसी जगहों पर हुआ यह विरोध दर्शाता है कि आने वाले समय में हुमायूं के लिए कोलकाता और उसके आसपास के क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करना काँटों भरी राह साबित होने वाला है। फिलहाल, पुलिस इस मामले में किसी लिखित शिकायत का इंतजार कर रही है, लेकिन बिना झंडे-बैनर के हुए इस जनाक्रोश ने हुमायूं की नई पार्टी की संभावनाओं पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।