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अधीर रंजन की चुनाव आयोग को दो-टूक
कोलकाता। मतुआ समुदाय के वोटाधिकार पर उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस वर्किंग कमिटी सदस्य और पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधुरी सोमवार को मतुआ प्रतिनिधियों के साथ मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर पहुंचे। उन्होंने साफ कहा कि हिन्दू बांग्लादेशी मतुआ घुसपैठिए नहीं, शरणार्थी हैं। उनका वोटाधिकार छीना नहीं जा सकता। अधीर रंजन ने केंद्र और बंगाल सरकार दोनों पर मतुआ समुदाय को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दोनों सरकारों ने मतुआ वोटों से फायदा तो लिया, पर कभी उनका भला नहीं किया। उन्होंने कहा कि एसआईआर के नाम पर मतुआ समुदाय के लोगों में डर और भ्रम फैलाया जा रहा है। मतुआ संगठनों का आरोप है कि नए नियमों के तहत वोटर लिस्ट में नाम बनाए रखने के लिए मैट्रिक पास सर्टिफिकेट, पासपोर्ट जैसे कागज मांगे जा रहे हैं, जो विस्थापन और गरीबी के कारण उनके पास कभी थे ही नहीं। अधीर ने कहा कि जो लोग दशकों से वोट दे रहे हैं, उनसे अचानक नए कागज मांगना अमानवीय है। मतुआ समुदाय के कई लोग शिक्षा से वंचित रहे, वे मैट्रिक सर्टिफिकेट कहां से लाएँ?
कॉलेज स्ट्रीट से निकली रैली को कोलकाता पुलिस ने बेंटिंक स्ट्रीट के पास रोक दिया था। इसके बाद अधीर रंजन के नेतृत्व में पाँच सदस्यीय प्रतिनिधि दल चुनाव आयोग पहुंचा और अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने आयोग कार्यालय पहुँच कर कहा कि 2024 की वोटर लिस्ट को आधार माना जाए और एसआईआर में किसी भी मतुआ का नाम न काटा जाए। मतुआ संगठनों ने कहा कि बांग्लादेश से आए शरणार्थियों को संविधान ने भारतीय मूल का माना है, इसलिए उनका वोटाधिकार छीनना अन्याय होगा।
अधीर की भावुक अपील करते हुए कहा कि मैं राजनीति के लिए नहीं, मानवता के नाते आया हूँ। मतुआ समुदाय ने पिछले चार-पांच चुनावों में वोट दिया है। अब उनका नाम हटाना गलत है।