अपवित्र हुई मिट्टी को करेंगे 'पवित्र' : अभिषेक
कोलकाता। चुनाव के महासमर में नंदीग्राम की रणभूमि एक बार फिर सबसे बड़े सियासी अखाड़े में तब्दील हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को नंदीग्राम में कार्यकर्ता सभा को संबोधित करते हुए भाजपा के कद्दावर नेता और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी पर सीधा हमला बोला। अभिषेक ने नंदीग्राम की अस्मिता का मुद्दा उछालते हुए कहा कि तृणमूल ने इस बार भूमिपुत्र पवित्र कर को चुनावी मैदान में उतारा है, जो इसी मिट्टी की उपज हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शुभेंदु अधिकारी यहां के स्थायी निवासी नहीं हैं और नंदीग्राम की जनता इस बार बाहरी बनाम स्थानीय के फर्क को वोट की चोट से समझाएगी।
अभिषेक बनर्जी ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि नंदीग्राम हमेशा से मां, माटी और मानुष की विचारधारा का केंद्र रहा है। उन्होंने 2021 के चुनाव नतीजों का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त की हार पर आज भी सवालिया निशान हैं और मामला हाईकोर्ट में लंबित है। अभिषेक ने कार्यकर्ताओं को सचेत करते हुए कहा कि इस बार किसी भी स्तर पर आत्मसंतुष्टि की गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से उन बूथों पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया जहां पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। उन्होंने साफ किया कि हर बूथ पर मजबूत पकड़ ही जीत की गारंटी बनेगी। बिना नाम लिए शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए अभिषेक ने गंभीर आरोप लगाया कि जिन लोगों को नंदीग्राम की जनता ने जनप्रतिनिधि चुना, उन्होंने ही दिल्ली के आकाओं को पत्र लिखकर राज्य के विकास फंड और जनकल्याणकारी योजनाओं का पैसा रुकवाया। उन्होंने कहा कि यह नंदीग्राम और बंगाल की जनता के साथ गद्दारी है। अभिषेक ने ममता सरकार की सेवाश्रय जैसी योजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार बिना किसी भेदभाव के हर धर्म और वर्ग के लोगों तक पहुंच रही है, जबकि विपक्षी नेता केवल अवरोध पैदा करने में जुटे हैं। नंदीग्राम सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प इसलिए भी है क्योंकि तृणमूल उम्मीदवार पवित्र कर कभी शुभेंदु अधिकारी के बेहद करीबी और उनके राजनीतिक सिपहसालार माने जाते थे। 2021 में शुभेंदु की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले पवित्र कर अब उन्हीं के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं। अभिषेक ने इसी रणनीतिक बढ़त का फायदा उठाते हुए उन्हें भूमिपुत्र के तौर पर पेश किया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे इस लड़ाई को व्यक्तिगत हमला न बनाकर नंदीग्राम के स्वाभिमान और विकास की लड़ाई के रूप में लड़ें। सभा में उमड़ी भारी भीड़ को देखकर उत्साहित अभिषेक ने इसे जनता का फैसला करार देते हुए दावा किया कि नंदीग्राम की जमीन पर इस बार बदलाव तय है।
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