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बेलडांगा हिंसा मामले में 15 आरोपितों की जमानत रद्द करवाने कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंची एनआईए

हालांकि, धारा 15 लागू होगी या नहीं, इस पर तत्काल कोई राय नहीं दी गई

20 Apr 2026

बेलडांगा हिंसा मामले में 15 आरोपितों की जमानत रद्द करवाने कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंची एनआईए

कोलकाता। मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में हुई हिंसा के मामले में आरोपितों की जमानत रद्द करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंची। एजेंसी ने न्यायमूर्ति अरिजीत बंद्योपाध्याय और न्यायमूर्ति अपूर्व सिंह राय की खंडपीठ के समक्ष अपनी अपील रखी। उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को तय की है।
एनआईए ने अदालत में कहा कि बेलडांगा हिंसा मामले में गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम की धारा 15 लागू होगी या नहीं, इसकी जांच सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर की जा रही है। लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही निचली अदालत ने हिंसा मामले के 15 आरोपितों को जमानत दे दी। इसी कारण एजेंसी ने उनकी जमानत रद्द करने की मांग की है। न्यायमूर्ति बंद्योपाध्याय ने कहा कि यदि एनआईए उचित कारण प्रस्तुत करती है, तो आरोपितों की जमानत रद्द की जा सकती है।
बेलडांगा हिंसा को लेकर पहले भी उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई थी। यह याचिका विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी दाखिल की थी। उस सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ ने कहा था कि केंद्र सरकार चाहे तो मामले की जांच एनआईए से करा सकती है। साथ ही राज्य सरकार को आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त केंद्रीय बल मांगने की भी अनुमति दी गई थी।
राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। वहां मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि लगभग एक माह पहले एनआईए को जांच सौंपी गई है और एजेंसी ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। हालांकि, धारा 15 लागू होगी या नहीं, इस पर तत्काल कोई राय नहीं दी गई।
सर्वोच्च न्यायालय ने एनआईए को निर्देश दिया था कि वह उच्च न्यायालय में बंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट जमा करे और बताए कि प्रारंभिक तौर पर अधिनियम लागू करने योग्य सामग्री मौजूद है या नहीं। बताया गया है कि यह रिपोर्ट अभी तक जमा नहीं की गई है।
जनवरी में झारखंड में एक प्रवासी श्रमिक की मौत के बाद बेलडांगा में तनाव फैल गया था। कई चरणों में हिंसा भड़की, तोड़फोड़ हुई, रेल रोकी गई, राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रदर्शन हुआ और पत्रकारों के साथ मारपीट की घटनाएं भी सामने आई थीं। हालात काबू करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था।
घटना के बाद राज्य पुलिस ने जांच शुरू की थी और निगरानी चित्रों की मदद से कई आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उच्च न्यायालय के आदेश पर मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई। इसके बाद एजेंसी ने आरोप लगाया था कि राज्य पुलिस केस से जुड़े दस्तावेज नहीं सौंप रही है, जबकि राज्य सरकार ने कहा था कि इस मामले में पुलिस पहले से कार्रवाई कर चुकी है।

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