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कोलकाता में अब 24 घंटे खुल सकेंगी दुकानें और दफ्तर
कोलकाता। भाजपा सरकार ने अपने पहले पूर्ण बजट में सूबे की शहरी अर्थव्यवस्था और कार्य संस्कृति की सूरत बदलने के उद्देश्य से एक बेहद क्रांतिकारी प्रस्ताव रखा है। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए घोषणा की कि कोलकाता समेत राज्य के सभी प्रमुख शहरों में अब दुकानों, रेस्तरां, निजी कार्यालयों, लॉजिस्टिक्स सेवाओं तथा हॉस्पिटैलिटी (होटल) प्रतिष्ठानों को चौबीसों घंटे खुला रखने और संचालित करने की अनुमति दी जाएगी। सरकार का दृढ़ विश्वास है कि इस बड़े सुधार से न केवल राज्य में राउंड द क्लॉक कार्य संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि उत्पादकता बढऩे के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर भी पैदा होंगे। शुरुआती चरण में इस व्यवस्था को कोलकाता और कुछ चुनिंदा बड़े कॉर्पोरेट व शहरी क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा, जिसके सफल रहने पर इसे पूरे राज्य में अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा।
दरअसल, बंगाल में अब तक वेस्ट बंगाल शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट, 1963 के कड़े नियमों के तहत ही तमाम दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खुलने व बंद होने का समय तय होता था। इसके तहत सामान्य दुकानों को सुबह 8 बजे से पहले खोलने और रात 10 बजे के बाद चालू रखने पर कानूनी पाबंदी थी। साथ ही, श्रम कानूनों के चलते कर्मचारियों के काम करने के घंटे भी सीमित थे, जहां कोई भी कर्मचारी रोजाना साढ़े आठ घंटे और सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कर सकता था। अब सरकार इन पुरानी पड़ चुकी समय सीमाओं को पूरी तरह बदलने का मन बना चुकी है, जिसके लिए आगामी दिनों में आवश्यक कानूनी संशोधन और प्रशासनिक बदलाव किए जाएंगे।
हालांकि, सरकार ने यह साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि चौबीसों घंटे व्यापार की छूट देने के दौरान रात्रिकालीन पाली में काम करने वाले श्रमिकों और विशेषकर महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, उनके श्रम अधिकारों, उचित मानदेय और सामाजिक सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बजट भाषण के अनुसार, इस 24म7 मॉडल से सबसे अधिक फायदा आईटी, लॉजिस्टिक्स, फूड डिलीवरी, होटल-रेस्तरां और रिटेल सेक्टर को मिलेगा। इसके अतिरिक्त, सरकार ने 4.38 लाख करोड़ रुपये से अधिक के इस भारी-भरकम बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और बुनियादी ढांचे पर भी विशेष फोकस रखा है, जिसके तहत सरकारी अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से लैस किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस ऐतिहासिक कदम से कोलकाता जैसे महानगर की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता अब मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे देश के अन्य अग्रणी मेट्रो शहरों के बराबर पहुंच सकेगी।