Please wait
select city
notifications
Live Tv
Search
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों को मिले कठोर दंडः संघ Sudhir wins historic डायमंड हार्बर में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नया मामला, ‘सेवाश्रय’ शिविर जांच के घेरे में Sudhir wins historic विपक्षी विधायकों को मिलेगा समान सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकार, विधानसभा में बोले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी Sudhir wins historic तृणमूल के तीन बैंक खातों पर रोक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, बैंक से हलफनामा और पुलिस से जांच रिपोर्ट तलब Sudhir wins historic बंगाल की खाड़ी में बन रहा गहरा निम्न दबाव, चार से आठ जुलाई तक दक्षिण बंगाल में भारी बारिश की चेतावनी Sudhir wins historic विधाननगर अस्पताल का नाम बदला, मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल Sudhir wins historic बंगाल में फिर गहराया बारिश का खतरा, सप्ताहांत में भारी से अति भारी वर्षा की चेतावनी Sudhir wins historic भड़काऊ बयान मामले में दो थानों से तलब किए जाने पर बोले हुमायूं कबीर — 'गिरफ्तार करना है तो कर लें, परवाह नहीं' Sudhir wins historic अंडा फेंकने की घटनाओं पर कलकत्ता हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट Sudhir wins historic रामनवमी हिंसा मामले में अपरूपा पोद्दार के पति शाकिर अली गिरफ्तार Sudhir wins historic

ब्रिगेड रैली में 'बड़ा ऐलान' नहीं, उद्योग-भत्ता और मतुआ मुद्दे पर भी चुप्पी

भाषण में ज्यादा 'सख्त संदेश', घुसपैठ और तुष्टिकरण पर रहा जोर

14 Mar 2026

ब्रिगेड रैली में 'बड़ा ऐलान' नहीं, उद्योग-भत्ता और मतुआ मुद्दे पर भी चुप्पी

कोलकाता। मिशन 2026 के शंखनाद के रूप में देखी जा रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक ब्रिगेड रैली ने बंगाल की सियासी तपिश तो बढ़ा दी है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों और कार्यकर्ताओं की उम्मीदों के उलट प्रधानमंत्री के पिटारे से कोई बड़ा ऐलान नहीं निकला। लगभग एक घंटे के संबोधन में प्रधानमंत्री का पूरा जोर राज्य सरकार की घेराबंदी और सख्त संदेश देने पर रहा। घुसपैठ, तुष्टिकरण और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को उन्होंने अपने भाषण के केंद्र में रखा, लेकिन उद्योग, भत्ता और मतुआ समुदाय जैसे संवेदनशील विषयों पर उनकी चुप्पी ने नई चर्चा छेड़ दी है। 
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत बंगाली भाषा में कर स्थानीय संवेदनाओं को छूने की कोशिश की और स्वामी विवेकानंद व रानी रासमणि जैसी विभूतियों को नमन किया। इसके बाद उन्होंने सीधे तौर पर ममता सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति अब और नहीं चलेगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि कट्टरपंथियों और अवैध गतिविधियों के खिलाफ भाजपा की सरकार आने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 
हालांकि, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि राज्य के वर्तमान माहौल में बेरोजगारी, शिक्षक भर्ती और उद्योगों की कमी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर प्रधानमंत्री से किसी बड़े रोडमैप या आर्थिक पैकेज की घोषणा की उम्मीद थी, जो उनके भाषण में नदारद दिखी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित अपमान को लेकर उन्होंने सरकार को जरूर घेरा, लेकिन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और महिलाओं के लिए भत्ते जैसे वादों पर वे मौन रहे, जबकि प्रदेश भाजपा नेता लगातार सत्ता में आने पर इन्हें बढ़ाने का दावा कर रहे थे। 
मतुआ समुदाय, जो बंगाल की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाता है, को लेकर भी प्रधानमंत्री ने कोई विशेष चर्चा नहीं की। कार्यकर्ताओं का एक वर्ग जहाँ प्रधानमंत्री के सख्त तेवरों से उत्साहित है, वहीं दूसरा वर्ग किसी ठोस चुनावी वादे या आर्थिक दिशा-निर्देश की कमी को महसूस कर रहा है। कुल मिलाकर, ब्रिगेड की इस सभा से भाजपा ने अपना वैचारिक एजेंडा तो स्पष्ट कर दिया है, लेकिन विकास और रोजगार के मोर्चे पर जनता को लुभाने के लिए शायद अभी और इंतजार करना होगा।

Comments

No comments to show. Log in to add some!

Other Relevant Stories


उद्योग-भत्ता और मतुआ मुद्दे पर भी चुप्पी
भाषण में ज्यादा 'सख्त संदेश', घुसपैठ और तुष्टिकरण पर रहा जोर





Download The Taaza Tv App Now to Stay Updated on the Latest News!


play store download
app store download
app img


Breaking News