तारातला में निर्माणाधीन गोदाम की छत ढही, 3 मजदूरों की मौत, 18 को बचाया गया
ईडी अब इस पूरे नेटवर्क और धन के प्रवाह की विस्तृत जांच में जुटा हुआ है
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्तारी के मामले में फिलहाल कलकत्ता उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को न्यायमूर्ति शम्पा दत्त पाल की अदालत में मामले की सुनवाई हुई, जहां अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकरण की सुनवाई नियमित पीठ में की जाएगी और फिलहाल किसी प्रकार की अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती।
सुनवाई के दौरान अदालत ने ईडी को गिरफ्तारी से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। वहीं, सुजीत बोस को भी इस मामले में हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है।
सुजीत बोस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दे रहे हैं और वह मामले में आरोपित नहीं हैं। हालांकि, अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि, ईडी ने 11 मई को सुजीत बोस को गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह जेल हिरासत में हैं। वहीं से उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। गुरुवार को उनके अधिवक्ता ने इस मामले को लेकर अदालत का ध्यान आकर्षित किया था, जिसके बाद याचिका दाखिल करने की अनुमति दी गई।
दरअसल, पूर्व नियुक्ति भ्रष्टाचार मामले की जांच के दौरान दक्षिण दमदम नगरपालिका में कथित अवैध नियुक्तियों को लेकर सुजीत बोस का नाम सामने आया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश अवैध तरीके से की गई थी।
ईडी सूत्रों के अनुसार, कथित सूची में करीब 150 नौकरी अभ्यर्थियों के नाम शामिल हैं। एजेंसी को आशंका है कि इस कथित भ्रष्टाचार से अर्जित धनराशि विभिन्न बैंक खातों में जमा की गई। इसी कारण कई बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
ईडी अब इस पूरे नेटवर्क और धन के प्रवाह की विस्तृत जांच में जुटा हुआ है।