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यह बिल केवल विपक्ष ही नहीं, भाजपा के सहयोगियों को भी खत्म कर देगा
कोलकाता। केंद्र सरकार लोकसभा में 130वां संविधान संशोधन बिल पेश करने जा रही है। इस बिल का प्रावधान है कि यदि कोई मुख्यमंत्री या मंत्री किसी आपराधिक मामले में गिरफ्तार होकर लगातार 30 दिन पुलिस हिरासत में रहता है, तो उसे पद से हटाना अनिवार्य होगा। बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह यह बिल लोकसभा में पेश करेंगे। इस संशोधन बिल को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर कड़ा हमला बोला है।
तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि यह बिल न केवल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाएगा बल्कि भाजपा के सहयोगी दल भी इससे अछूते नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर कोई सहयोगी मोदी-शाह की बात नहीं मानेगा तो उसका भी 'घ्याचांग फू' यानी गला काट दिया जाएगा। महुआ ने आरोप लगाया कि संविधान के अनुसार किसी जनप्रतिनिधि को तभी पद से हटाया जा सकता है, जब अदालत उसे दोषी करार देते हुए सात वर्ष से अधिक की सजा सुनाए। लेकिन यह बिल संविधान और न्याय व्यवस्था दोनों को दरकिनार कर देता है। केंद्र सरकार चाहे तो ईडी और सीबीआई के जरिए झूठे मामले दर्ज कर किसी भी मुख्यमंत्री या मंत्री को 30 दिन के भीतर पद से हटा सकती है। महुआ ने दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि सत्येंद्र जैन चार साल जेल में रहे, बाद में सीबीआई ने खुद कहा कि हमारे पास कोई सबूत नहीं है। आज ईडी का हाल यह है कि 100 में से सिर्फ 1 मामले में सजा हो पाती है। महुआ ने आरोप लगाया कि यह संशोधन बिल देश के संघीय ढांचे और न्यायपालिका को कमजोर करने की कोशिश है। उनके अनुसार किसी को भी दोषी या निर्दोष साबित करने का अधिकार केवल अदालत का है। लेकिन यह बिल अदालत के फैसले से पहले ही सजा सुना देता है। गौरतलब है कि इस बिल के दायरे में प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और सभी मंत्री आएंगे। यह प्रावधान केंद्र सरकार, राज्य सरकार और केंद्रशासित प्रदेशों पर समान रूप से लागू होगा।
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