प्रधानमंत्री ने टाटा का नाम न लेते हुए बंगाल की वर्तमान स्थिति को निवेश में सबसे बड़ी बाधा बताया
कोलकाता। बंगाल की राजनीति में उद्योग बनाम कृषि की रणभूमि रहे सिंगूर में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा ने स्थानीय भाजपा नेतृत्व को पशोपेश में डाल दिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी और प्रदेश के शीर्ष नेताओं द्वारा बार-बार 'हाथ-पैर जोड़कर' टाटा को वापस लाने के दावों के विपरीत, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में टाटा समूह का नाम तक नहीं लिया। सिंगूर की उस ऐतिहासिक जमीन पर, जहां से टाटा नैनो परियोजना को विदा होना पड़ा था, वहां खड़े होकर प्रधानमंत्री ने बंगाल में औद्योगीकरण और नौकरियों का वादा तो किया, लेकिन किसी विशेष समूह या टाटा को वापस लाने पर चुप्पी साधे रखी। शुभेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार जैसे नेताओं ने जनता को भरोसा दिलाया था कि भाजपा सत्ता में आते ही टाटा को सिंगूर लौटाएगी, लेकिन प्रधानमंत्री के भाषण में इस विशिष्ट आश्वासन की कमी खली। हुगली संगठनात्मक जिला भाजपा के अध्यक्ष गौतम चट्टोपाध्याय सहित कई स्थानीय नेताओं को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री सिंगूर के लिए कोई स्पेशल पैकेज या उद्योग का ठोस रोडमैप पेश करेंगे। सभा के बाद एक स्थानीय भाजपा नेता ने दबी जुबान में कहा कि हम क्षेत्र के लोगों से वादा कर रहे थे कि मोदी जी टाटा को लेकर कोई बड़ी घोषणा करेंगे। अब जनता के बीच जाकर हम क्या जवाब देंगे, यह समझ नहीं आ रहा।
प्रधानमंत्री ने टाटा का नाम न लेते हुए बंगाल की वर्तमान स्थिति को निवेश में सबसे बड़ी बाधा बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल में हर काम पर सिंडिकेट टैक्स वसूला जाता है, जिससे निवेशक डरते हैं। माफियाओं को मिली खुली छूट ने बंगाल की छवि खराब की है। भाजपा की सरकार बनते ही माफिया और सिंडिकेट राज खत्म होगा, तभी उद्योग आएंगे। निराशा के बीच भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने प्रधानमंत्री के रुख का बचाव भी किया है। एक जिला पदाधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री का पद बहुत गरिमामयी होता है, वे बिना किसी ठोस निवेश प्रक्रिया के किसी कंपनी विशेष का नाम नहीं ले सकते। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री टाटा का नाम लेते और तकनीकी कारणों से वे नहीं आते, तो पार्टी की छवि खराब होती। भाजपा का लक्ष्य उद्योग लाना है, फिर चाहे वह टाटा हो या कोई और समूह। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री की चुप्पी रणनीतिक हो सकती है, लेकिन सिंगूर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जहां सिंगूर बंजर भूमि पुनव्र्यवहार समिति लंबे समय से उद्योगों की मांग कर रही है, वहां कोई स्पष्ट वादा न मिलना भाजपा के स्थानीय अभियान को प्रभावित कर सकता है।