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दर्शकों का कहना है कि स्टेडियम में प्रवेश के समय उन्हें बाहर से पानी या कोई भी खाद्य सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं दी गई
कोलकाता। साल्टलेक स्टेडियम में लियोनल मेसी के कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्था और हिंसा के बाद अब एक नया विवाद सामने आया है। इस बार मुद्दा है स्टेडियम के भीतर पानी और खाद्य पदार्थों की आसमान छूती कीमतें। कार्यक्रम में मौजूद हजारों दर्शकों ने आरोप लगाया है कि जहां बाहर 20 रुपये में मिलने वाली पानी की बोतल, स्टेडियम के अंदर 150 से 200 रुपये तक में बेची गई। कार्यक्रम के बाद सामने आई तस्वीरों और वीडियो ने इस आरोप को और हवा दे दी है।
दर्शकों का कहना है कि स्टेडियम में प्रवेश के समय उन्हें बाहर से पानी या कोई भी खाद्य सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं दी गई। ऐसे में अंदर पहुंचने के बाद वे पूरी तरह स्टेडियम के अंदर मौजूद विक्रेताओं पर निर्भर हो गए। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर पानी और खाने-पीने की चीजें मनमाने दामों पर बेची गईं। अब इस पूरे मामले में पानी विक्रेताओं को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। हालांकि, कई विक्रेताओं का दावा है कि वे खुद तय कीमतों पर पानी बेच रहे थे और उन्हें आयोजकों या ठेकेदारों द्वारा निर्धारित रेट से अलग दाम लेने की कोई छूट नहीं थी। उनका कहना है कि कीमतें पहले से तय थीं और उसी के अनुसार बिक्री की जा रही थी। इससे सवाल उठता है कि आखिर इन ऊंची कीमतों को तय किसने किया? क्या इसके पीछे आयोजक संस्था, ठेकेदार या स्टेडियम प्रबंधन की भूमिका थी? विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े सार्वजनिक आयोजन में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी आयोजकों और प्रशासन की होती है।
कई प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्टेडियम में बाद में जो बोतलबाज़ी देखने को मिली, उसकी एक बड़ी वजह यही महंगाई भी थी। दर्शकों का गुस्सा सिर्फ मेसी को न देख पाने तक सीमित नहीं था, बल्कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर की गई कथित लूट ने भी आक्रोश को भड़का दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक तैयारी और आयोजकों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दर्शकों का कहना है कि यदि स्टेडियम में मुफ्त या नियंत्रित दरों पर पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था होती, तो हालात इतने नहीं बिगड़ते। अब मांग उठ रही है कि इस मामले की भी जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि पानी और खाद्य पदार्थों की कीमतें किसके निर्देश पर बढ़ाई गईं। साथ ही, भविष्य में इस तरह के आयोजनों में दर्शकों के साथ इस प्रकार की कथित लूट को रोकने के लिए ठोस दिशानिर्देश तय किए जाएं। साल्टलेक कांड अब सिर्फ अव्यवस्था और हिंसा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आयोजन प्रबंधन, जनसुविधाओं और जवाबदेही का भी बड़ा सवाल बनकर सामने आ गया है।