बंगाल विधानसभा चुनाव का मार्च के पहले सप्ताह में होगा शंखनाद
कोलकाता। बंगाल में सत्ता के महासंग्राम की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। राज्य में चुनावी सरगर्मियों के बीच बड़ी खबर यह आ रही है कि निर्वाचन आयोग 2 मार्च को विधानसभा चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय चुनाव आयोग इस बार बंगाल में तीन चरणों में मतदान कराने की रणनीति पर विचार कर रहा है। हालांकि, राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले एक चरण में चुनाव कराने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन सुरक्षा मानकों और केंद्रीय बलों की उपलब्धता को देखते हुए अब तीन चरणों का विकल्प सबसे ऊपर नजर आ रहा है। चुनाव की घोषणा में हो रही देरी का मुख्य कारण विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया है। हाल ही में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी। ताजा अपडेट के अनुसार, मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के तुरंत बाद अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
प्रशासनिक हलकों में 2 मार्च की तारीख को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है, क्योंकि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई, 2026 को समाप्त हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग भौगोलिक स्थिति और संवेदनशीलता के आधार पर राज्य को तीन हिस्सों में बांट सकता है। जिसमें प्रथम चरण में उत्तर बंगाल के सभी 8 जिलों में एक साथ मतदान कराया जा सकता है। इसमें कूचबिहार और मालदा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रहेगी। वही द्वितीय चरण में कोलकाता, हावड़ा, हुगली, नदिया और दोनों 24 परगना जिलों को एक चरण में शामिल किया जा सकता है। यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से सबसे अधिक सक्रिय और चुनौतीपूर्ण माना जाता है। जबकि अंतिम और तृतीय चरण में झाडग़्राम, पूर्व व पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुड़ा, पुरुलिया, बीरभूम और बर्धमान जिलों में आखिरी चरण का मतदान होने की संभावना है।
बंगाल चुनाव में हमेशा से हिंसा और अशांति एक बड़ी चुनौती रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने मुर्शिदाबाद, बीरभूम और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों को अशांति-प्रवण की श्रेणी में रखा है। चरणों की अंतिम संख्या काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि गृह मंत्रालय कितनी संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बल उपलब्ध करा पाता है। आयोग की फुल बेंच की आगामी बैठक में इन सुरक्षा पहलुओं और माइक्रो-ऑब्जर्वर्स की तैनाती पर अंतिम मुहर लगनी बाकी है। फिलहाल, सभी राजनीतिक दलों की नजरें दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन पर टिकी हैं। 2 मार्च को होने वाली संभावित घोषणा के साथ ही राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी, जिसके बाद बंगाल की राजनीति एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच जाएगी।