प्रवासी बंगालियों को साधने में जुटी भाजपा, सुकांत-शमिक ने संभाली कमान
कोलकाता। विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने एक ऐसी रणनीति पर काम शुरू किया है, जो राज्य के चुनावी इतिहास में पासा पलटने वाली साबित हो सकती है। पार्टी इस बार उन लाखों बंगालियों को वोट बैंक के रूप में देख रही है, जो आजीविका की तलाश में राज्य से बाहर दूसरे प्रदेशों में रह रहे हैं। भाजपा का मानना है कि यदि इन प्रवासी श्रमिकों और कर्मसूत्रे प्रवासियों को मतदान के दिन बंगाल वापस लाया जा सके, तो सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। इसके लिए पार्टी बिहार के आरजेडी और पंजाब के आम आदमी पार्टी (आप) के सफल चुनावी मॉडल को बंगाल में आजमाने की तैयारी में है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि बिहार में लालू प्रसाद यादव की आरजेडी वर्षों से कोलकाता जैसे शहरों में रहने वाले बिहारियों को चुनाव के समय गांव वापस बुलाकर मतदान कराती रही है। वहीं, पंजाब में आप ने 2017 और 2022 में विदेशों और अन्य राज्यों में बसे पंजाबियों को एकजुट कर राज्य में माहौल बदला था। अब भाजपा इसी तर्ज पर गुजरात, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे दूर-दराज के राज्यों में रह रहे करीब 70 लाख बंगालियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद देश के अलग-अलग शहरों में जाकर वहां बसे बंगाली समुदाय के साथ बैठकें कर रहे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य वर्तमान में गुजरात के दौरे पर हैं, जहां अकेले सूरत में ही ढाई लाख से अधिक बंगाली हीरा और जऱी कारोबार से जुड़े हैं। शमिक भट्टाचार्य ने बताया कि सूरत में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के 25 से अधिक संगठनों ने बंगाल में बदलाव की इच्छा जताई है। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार का कहना है कि पार्टी केवल श्रमिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरे राज्यों में बसे पूरे बंगाली समाज को एकजुट कर रही है। जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं हैं, उनसे भी अपील की जा रही है कि वे अपने रिश्तेदारों के जरिए बंगाल में विकास का संदेश पहुंचाएं। पार्टी उन प्रवासियों के लिए यात्रा खर्च उठाने का आश्वासन भी दे रही है, जिनके लिए बंगाल वापस आना आर्थिक रूप से कठिन है। भाजपा नेता गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों की कंपनियों और संस्थानों से भी बातचीत कर रहे हैं ताकि मतदान के लिए जाने वाले कर्मचारियों को आवश्यक छुट्टी मिल सके। इस काम में स्थानीय भाजपा इकाइयों की भी मदद ली जा रही है। इसके लिये नेताओं को अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक लॉकेट चटर्जी उत्तराखंड के देहरादून और हरिद्वार में जनसंपर्क करेंगी जबकि ज्योतिर्मय सिंह महतो झारखंड के बोकारो का दौरा करेंगे।
जगन्नाथ सरकार लखनऊ और गोवा में बैठकों का नेतृत्व कर चुके हैं वही कार्तिक पाल व रथींद्रनाथ बोस: क्रमश: पटना और पुणे का दौरा कर चुके हैं। प्रवासियों की संख्या को लेकर भी राज्य में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। तृणमूल कांग्रेस के 'प्रवासी श्रमिक कल्याण बोर्ड' के अध्यक्ष सामीरुल इस्लाम का दावा है कि यह संख्या 30 लाख है। वहीं, सुकांत मजूमदार का कहना है कि यह संख्या कम से कम 70 लाख है। भाजपा के अनुसार, अकेले बेंगलुरु में 15 लाख और सूरत में ढाई लाख बंगाली हैं। पार्टी का मानना है कि यह विशाल जनसमूह इस बार 'ममता सरकार' के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभा सकता है।