उत्तर 24 परगना में सर्वाधिक 30, कोलकाता में 12 कंपनियों का पहरा
कोलकाता। बंगाल में आगामी चुनावों के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए निर्वाचन आयोग ने अपनी कमर कस ली है। राज्यव्यापी सुरक्षा योजना को अंतिम रूप देते हुए आयोग ने केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती का विस्तृत खाका तैयार कर लिया है। इस योजना के तहत राज्य के सबसे संवेदनशील माने जाने वाले उत्तर 24 परगना जिले में सुरक्षा का सबसे कड़ा घेरा रहेगा, जहाँ कुल 30 कंपनियां तैनात की जाएंगी। वहीं, राजधानी कोलकाता की सुरक्षा की जिम्मेदारी 12 कंपनियों के कंधों पर होगी।
आयोग के निर्णय के अनुसार, केंद्रीय बलों की पहली खेप आगामी शुक्रवार से चरणबद्ध तरीके से बंगाल पहुंचना शुरू कर देगी। उत्तर 24 परगना के तीन पुलिस जिलों और दो पुलिस कमिश्नरेट को मिलाकर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। कोलकाता पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में भी रविवार से ही बलों की सक्रियता बढ़ जाएगी। 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के ठीक अगले दिन यानी 1 मार्च से जवान मोर्चा संभाल लेंगे। आयोग ने जिलों की संवेदनशीलता के आधार पर बलों का बंटवारा किया है। मुर्शिदाबाद के दो पुलिस जिलों में 16 कंपनियां मोर्चा संभालेंगी, जबकि हावड़ा (कमिश्नरेट व जिला पुलिस) और दक्षिण 24 परगना में 15-15 कंपनियां तैनात की जा रही हैं। पूर्व मेदिनीपुर में 14, मालदा और नदिया में 12-12 तथा उत्तर दिनाजपुर में 11 कंपनियों की तैनाती तय की गई है। पहाड़ी क्षेत्रों की बात करें तो दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी को मिलाकर 9 कंपनियां दी गई हैं, जबकि कूचबिहार में भी 9 और पूर्व बर्धमान में 8 कंपनियां तैनात होंगी। अन्य जिलों जैसे पश्चिम बर्धमान, पश्चिम मेदिनीपुर, जलपाईगुड़ी, बांकुरा और बीरभूम में 7-7 कंपनियां सुरक्षा का जिम्मा संभालेंगी। इस बार की तैनाती में विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों का समन्वय देखने को मिलेगा। कुल 240 कंपनियों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी सीआरपीएफ(110 कंपनियां) की है। इसके अलावा 55 कंपनियां बीएसएफ , 21 सीआईएसएफ, 27 आईटीबीपी और 27 कंपनियां एसएसबी की शामिल होंगी। गृह मंत्रालय ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि प्रत्येक कंपनी में जवानों की संख्या 72 से कम नहीं होनी चाहिए। निर्वाचन आयोग की रणनीति केवल इन 240 कंपनियों तक सीमित नहीं है।
प्रारंभिक चरण के बाद 10 मार्च तक राज्य में अतिरिक्त 240 कंपनियां और भेजी जाएंगी, जिससे कुल संख्या 480 कंपनियों तक पहुंच जाएगी। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान आयोग ने आठ चरणों में लगभग 1100 कंपनियां तैनात की थीं। इस बार भी आयोग का मुख्य उद्देश्य राज्य में शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पूरी तरह से भयमुक्त चुनावी माहौल सुनिश्चित करना है, ताकि मतदाता बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।