हॉस्टल में कथित दुष्कर्म ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल
कोलकाता। देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में गिने जाने वाले आईआईएम जोका में हॉस्टल के अंदर कथित दुष्कर्म की घटना सामने आने के बाद संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जबकि परिसर में करीब 80 सीसीटीवी कैमरे, 75 सुरक्षाकर्मी, 20 से अधिक लॉगबुक, हर हॉस्टल वार्ड में सुरक्षा गार्ड और कई सुरक्षा चेकपॉइंट मौजूद हैं, फिर भी इस जघन्य वारदात का होना सुरक्षा के नाम पर बज्र की रस्सी, लेकिन कमजोर गांठ जैसा प्रतीत होता है। हालांकि, हॉस्टल के भीतर ऐसी वारदात से सुरक्षा की पोल खुल गई है। अब संस्थान ने स्थिति संभालने की कोशिश में छात्रों को मीडिया से बात न करने की हिदायत दी है और कुछ तय 'जवाबÓ साझा किए हैं।
छात्रों से कहा गया है कि यदि कोई मीडियाकर्मी संपर्क करे, तो उन्हें सिर्फ इतना कहना है जांच चल रही है और संस्थान पुलिस को पूरा सहयोग दे रहा है। इतना ही नहीं, सूत्रों के अनुसार प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पुलिस या जांच टीम सिर्फ उस कमरे तक जा सकती है जहां घटना घटी है। अन्य कमरों में जाने के लिए सुरक्षा गार्ड की अनुमति आवश्यक है। सामान्यत: आईआईएम के गेट पर बाहरी लोगों की पहचान होती है, आईडी चेक होती है, लॉगबुक में एंट्री ली जाती है, और जिनसे मिलने आया है उनसे संपर्क कर पुष्टि की जाती है। छात्रों को गेस्ट बुलाने के लिए दो दिन पहले ईमेल करना होता है और मंजूरी मिलने पर ही आगंतुक को प्रवेश मिलता है।
लेकिन सवाल यह है कि वह लड़की कब आई, उसके दस्तावेज क्यों दर्ज नहीं हुए? लॉगबुक में उसका नाम या दस्तखत क्यों नहीं है? जिस हॉस्टल रूम में घटना हुई, वहां तक वह कैसे पहुंची? जब वह गंभीर अवस्था में बाहर निकली, तो किसी गार्ड या स्टाफ ने उसे क्यों नहीं रोका या सहायता क्यों नहीं दी? नाम न छापने की शर्त पर कई छात्रों ने बताया कि नियम होने के बावजूद प्रभावशाली छात्र अक्सर उन्हें तोड़ते रहे हैं। कई बार हॉस्टल के बाहर सुरक्षा गार्ड होते ही नहीं। बॉयोमेट्रिक सिस्टम की मांग लंबे समय से हो रही है, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। केंद्रीय विद्यालय के छोटे बच्चे तक एमबीए हॉस्टल में घुस आते हैं। रात में लड़कों का लड़कियों के हॉस्टल और लड़कियों का लड़कों के हॉस्टल में आना-जाना आम बात है। लॉगबुक में मैन गेट के अलावा हॉस्टलों में आने-जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। आईआईएम के कार्यकारी निदेशक ने बयान जारी कर कहा कि हम ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हैं और हमेशा एक सुरक्षित एवं सम्मानजनक कैंपस के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर सुरक्षा इतनी चाकचौबंद थी, तो फिर ये घटना कैसे घटी? आईआईएम जोका जैसे संस्थान में यदि इस तरह की घटना घट सकती है तो यह पूरे उच्च शिक्षण जगत के लिए एक चेतावनी है। संस्थानों को केवल सुरक्षा के दिखावे से नहीं, बल्कि प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही के साथ सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। छात्रों की स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना ही इस तरह की घटनाओं को रोकने का एकमात्र रास्ता है।