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कोलकाता में अवैध निर्माण वैध करने के नियमों पर उठे सवाल

इसके बावजूद देश के कई राज्यों में अब भी अवैध निर्माण को वैध करने की अलग-अलग योजनाएं लागू हैं

23 May 2026

कोलकाता में अवैध निर्माण वैध करने के नियमों पर उठे सवाल

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बाद कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के भीतर भी समीकरण बदलने लगे हैं। अवैध निर्माण के खिलाफ चल रहे बुलडोजर अभियान के बीच अब अवैध निर्माण को जुर्माने के बदले वैध करने की व्यवस्था को लेकर नया विवाद सामने आया है। नगर निगम के अधिकारियों का एक वर्ग मौजूदा कानून में संशोधन कर “माइनर डेविएशन” यानी मामूली विचलन की स्पष्ट परिभाषा तय करने की मांग कर रहा है।
दरअसल, वर्ष 2015 में कोलकाता नगर निगम ने “कोलकाता म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (रेगुलराइजेशन ऑफ बिल्डिंग) रेगुलेशंस, 2015” लागू किया था। इसके तहत स्वीकृत भवन मानचित्र से मामूली विचलन होने पर जुर्माना लेकर निर्माण को वैध करने का प्रावधान रखा गया। लेकिन नियमों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कितनी सीमा तक के उल्लंघन को “मामूली” माना जाएगा। इसी अस्पष्टता का लाभ उठाकर वर्षों तक बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण को भी वैधता दिए जाने के आरोप लगते रहे हैं।
नगर निगम के सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक प्रभाव और आर्थिक लेनदेन के जरिए कई गंभीर नियम उल्लंघनों को भी वैध किया गया। अब शहरभर में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई चलने के बीच निगम अधिकारियों का मानना है कि कानून की इस खामी को दूर किए बिना भविष्य में ऐसे निर्माणों पर रोक लगाना संभव नहीं होगा।
बिल्डिंग विभाग के अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि कानून में स्पष्ट रूप से यह निर्धारित किया जाए कि अतिरिक्त निर्माण का कितना प्रतिशत, साइड स्पेस में कितनी कमी, ऊंचाई में कितना अंतर अथवा अतिरिक्त निर्मित क्षेत्र को “माइनर डेविएशन” माना जाएगा। साथ ही इसके मापदंड तय करने के लिए तकनीकी मानक भी निर्धारित किए जाने की मांग की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि इससे प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध निर्माण को वैध बनाने में होने वाले दुरुपयोग पर भी रोक लगेगी। सुप्रीम कोर्ट भी कई मामलों में यह टिप्पणी कर चुका है कि अवैध निर्माण को नियमित करना सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपवाद होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा है कि लगातार रेगुलराइजेशन की व्यवस्था कानून उल्लंघन को बढ़ावा देती है और शहरी नियोजन को प्रभावित करती है।
इसके बावजूद देश के कई राज्यों में अब भी अवैध निर्माण को वैध करने की अलग-अलग योजनाएं लागू हैं। महाराष्ट्र के मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और पिंपरी-चिंचवाड़ में ऐसी व्यवस्था प्रभावी है। दिल्ली, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और गुजरात में भी विभिन्न प्रकार की रेगुलराइजेशन योजनाएं संचालित हैं। हालांकि इनमें सामान्यतः समय सीमा, शुल्क जमा करने और विकास नियंत्रण नियमों का पालन करने जैसी शर्तें लागू होती हैं।
अधिकारियों के अनुसार, तटवर्ती क्षेत्र, वनभूमि, रक्षा भूमि, खेल मैदान या सार्वजनिक खुले स्थान पर बने निर्माण तथा खतरनाक भवनों को किसी भी स्थिति में वैधता नहीं दी जाती। उनका मानना है कि कोलकाता में भी यदि स्पष्ट और कठोर नियम लागू किए जाएं तो अवैध निर्माण पर काफी हद तक नियंत्रण संभव होगा।

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