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एयरपोर्ट के पास विस्फोटक छिपाने के पीछे बड़ी साजिश की आशंका
कोलकाता। राजारहाट अंतर्गत नारायणपुर के सुपारी बागान इलाके में हुए भीषण बम विस्फोट मामले में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। तफ्तीश में जुटी पुलिस टीम ने इस मामले के मुख्य आरोपी मोहम्मद शमीम उर्फ काना शमीम और उसके एक अन्य सहयोगी शाहेंशाह को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए काना शमीम को कामारहाटी इलाके से दबोचा, जबकि शाहेंशाह को नारायणपुर इलाके से ही गिरफ्तार किया गया। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब जांच एजेंसियां इस बात की गहन पड़ताल कर रही हैं कि आरोपियों ने विस्फोटकों को रखने और बम बनाने के लिए कोलकाता इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बेहद नजदीक स्थित नारायणपुर इलाके को ही क्यों चुना। पुलिस इस संवेदनशील पहलू की जांच कर रही है कि क्या हवाई अड्डे के पास इस सुरक्षित ठिकाने को चुनने के पीछे कोई बड़ी और खतरनाक साजिश रची जा रही थी।
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। घटना स्थल की स्थिति को देखते हुए फॉरेंसिक और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह केवल साधारण सुतली बम का धमाका नहीं था, क्योंकि सुतली बम से इतना जोरदार विस्फोट होना मुमकिन नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि किराए के इस मकान में बड़े पैमाने पर बम बनाने की कच्ची सामग्री यानी बारूद और अन्य विस्फोटक मसाले भारी मात्रा में जमा करके रखे गए थे। जांचकर्ता अब इस बिंदु पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि क्या शहर को दहलाने के लिए किसी बड़े विस्फोट की तैयारी की जा रही थी। हालांकि, मुख्य आरोपी काना शमीम बेहद शातिर है और पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान जांच टीम को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है तथा सहयोग नहीं कर रहा है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, गिरफ्तार मोहम्मद शमीम उर्फ काना शमीम कोई साधारण अपराधी नहीं है, बल्कि उसका आपराधिक इतिहास दो दशक से भी अधिक पुराना है। वह इलाके का एक कुख्यात और पेशेवर अपराधी माना जाता है। पुलिस फाइलों के अनुसार, वर्ष 2000 में एक डकैती के मामले में वह पहली बार कानून के शिकंजे में आया था। जेल से छूटने के बाद उसने कामारहाटी और आसपास के इलाकों में सिलसिलेवार बमबाजी की घटनाओं को अंजाम दिया और फरार हो गया। इसके बाद वर्ष 2002 में उसके दो बेहद करीबी सहयोगियों इरफान और बॉम्बैया की गैंगवार में हत्या हो गई, जिसके बाद वह कुछ समय के लिए भूमिगत हो गया था। इसके बाद वर्ष 2014 में उसने एक बार फिर कामारहाटी में वापसी कर भारी बमबाजी की, जिसके बाद उसे दोबारा सलाखों के पीछे भेजा गया। जेल से बाहर आने के बाद उसने पुलिस और विरोधी गुटों से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदलने शुरू कर दिए। वर्ष 2021 के नगर निकाय चुनाव के दौरान भी वोट लूटने की नीयत से की गई भारी बमबाजी और फायरिंग की घटना में काना शमीम का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया था, जिसमें पुलिस अधिकारी जयंत विश्वास गंभीर रूप से घायल हो गए थे और तब से ही पुलिस को उसकी तलाश थी।
जांच में यह भी पता चला है कि काना शमीम अपने विरोधी गिरोहों और पुलिस की नजरों से बचने के लिए राजारहाट, न्यू टाउन और दमदम जैसे इलाकों में अपनी असली पहचान छिपाकर, फर्जी दस्तावेजों के सहारे किराए के मकानों में रह रहा था। नारायणपुर की घटना वाले दिन शमीम के ही एक करीबी गुर्गे ने उसके किराए के मकान में बमों से भरा एक संदिग्ध बैग लाकर रखवाया था। शमीम ने अपने बेटे के जरिए उस बैग को कमरे के भीतर रखवाया और उसके कुछ ही देर बाद मकान में एक जोरदार धमाका हो गया, जिससे पूरा इलाका दहल उठा। विस्फोट के तुरंत बाद शमीम मौके से भाग निकला और कामारहाटी में अपने पुराने सुरक्षित ठिकाने पर जा छिपा। राजारहाट नारायणपुर थाना पुलिस ने कामारहाटी पुलिस के सहयोग से आडिय़ादह के एक क्लब में दबिश देकर उसे धर दबोचा। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है कि इन विस्फोटकों की सप्लाई चेन कहां से जुड़ी थी और इसके पीछे किसी बड़े अंतरराज्यीय आपराधिक या आतंकी सिंडिकेट का हाथ तो नहीं है।