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तृणमूल भवन में लहराया लाल झंडा

13 साल बाद तृणमूल ने सीपीएम को लौटाई दफ्तर की चाबी

27 May 2026

तृणमूल भवन में लहराया लाल झंडा

कोलकाता। बंगाल की बदलती राजनीतिक फिजां के बीच हुगली के चुंचुड़ा में बुधवार को एक बेहद अनोखी और ऐतिहासिक तस्वीर देखने को मिली। जिस दफ्तर की दीवारों पर पिछले 13 वर्षों से तृणमूल का झंडा शान से लहरा रहा था, वहां एक बार फिर वामपंथ का लाल झंडा बुलंद हो गया। सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पूर्व तृणमूल विधायक असित मजूमदार ने खुद खादिनामोड़ स्थित इस विवादित कार्यालय पर पहुंचकर उसकी चाबियां वामपंथी श्रमिक संगठन सीटू के नेताओं को सौंप दीं। सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस द्वारा अपने पुराने कब्जे वाले दफ्तरों को वामपंथियों को वापस लौटाने की इस प्रक्रिया ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।
जीटी रोड के किनारे खादिनामोड़ पर स्थित यह महत्वपूर्ण कार्यालय साल 2011 से पहले तक माकपा और सीटू का मुख्य ठिकाना हुआ करता था। 2011 में जब राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन हुआ, तब तृणमूल समर्थकों ने इस दफ्तर पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था। इसके बाद इसे बाकायदा तृणमूल भवन का रूप दे दिया गया, जहां से जिला तृणमूल की तमाम बड़ी बैठकें, सांगठनिक रणनीतियां और राजनीतिक गतिविधियां संचालित होने लगीं। यहां तक कि पिछले चुनावों के दौरान पार्टी का मुख्य वार रूम भी इसी इमारत से चलाया गया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में हुगली सीट पर भाजपा की जीत के बाद इस दफ्तर पर कब्जे को लेकर भारी तनाव भी हुआ था, लेकिन तब पुलिस की मदद से तृणमूल ने अपना नियंत्रण बरकरार रखा। अब विधानसभा चुनाव में हार के बाद, पार्टी ने पुरानी कड़वाहट को भुलाकर इसे वापस करने का फैसला किया है। इससे पहले बैंडेल के लिचुबागान इलाके में भी टीएमसी ने एक दफ्तर लौटाया था।
सीटू नेताओं को चाबी सौंपने के बाद पूर्व विधायक असित मजूमदार ने कहा कि लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को काम करने का पूरा अधिकार है, इसलिए जिसका कार्यालय था, उसे सम्मानपूर्वक वापस कर दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भविष्य में भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में ही राजनीति जारी रखेंगे और आगामी 2029 के चुनाव व नगर पालिका चुनावों में पूरी ताकत के साथ सक्रिय रहेंगे। 
वामपंथी खेमे ने तृणमूल के इस कदम का स्वागत किया है। वरिष्ठ सीटू नेता गुरुदास बंद्योपाध्याय ने कहा कि 2011 में तृणमूल ने बदला नहीं, बदलाव चाहिए का नारा दिया था, लेकिन सत्ता में आते ही वामपंथियों के दफ्तर कब्जाए गए। देर से ही सही, आज असित मजूमदार ने महसूस किया और असली मालिकों को कार्यालय लौटा दिया। दूसरी ओर, चुंचुड़ा के भाजपा विधायक सुबीर नाग ने तंज कसते हुए कहा कि सत्ता जाने के बाद किसी का बोधोदय कब होगा, यह कहना मुश्किल है। उन्होंने साफ किया कि भाजपा कब्जे की राजनीति पर भरोसा नहीं करती और असली मालिकों को संपत्ति लौटाना एक सकारात्मक उदाहरण है।

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