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'सत्ता के लोभ में एक समुदाय के लिये काम ना करे ममता'
कोलकाता। पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार को अदूरदर्शिता की पराकाष्ठा बताते हुए केंद्र सरकार से इसके खिलाफ सख्त कदम उठाने को कहा है। सागरतट पर शाही स्नान करने पहुंचे शंकराचार्य ने आगाह करते हुए कहा कि बांग्लादेश में जो लोग हिंदुओं पर हमले कर रहे है, वे दरअसल अपने लिए खुद खतरा मोल रहे हैं। उन्हें सोचना चाहिए कि जहां वे अल्पसंख्यक हैं, वहां उनकी क्या दुर्दशा होगी।
उन्होंने केन्द्र सरकार के साथ साथ ममता सरकार को भी लताड़ लगाते हुए कहा कि ममता बनर्जी एक विशेष समुदाय के लिये काम कर रही है ताकि वो सत्ता पर बनी रहे लेकिन उन्हें सोचना चाहिये जिस दिन बहुसंख्यक जाग गया तो उनकी सत्ता नहीं रह जायेगी। उन्होंने कहा कि हिंदू और हिंदुत्व की रक्षा होने पर ही विश्व की रक्षा होगी क्योंकि सबके पूर्वज सनातनी ही हैं। जब तक हिंदू हैं, तभी तक मुसलमान भी सुरक्षित रहेंगे। केंद्र सरकार को दिशाहीन न होते हुए इस मामले में सख्त कदम उठाना चाहिए। शंकराचार्य ने बांग्लादेशी घुसपैठियों से भी सख्ती से निपटने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
आरजी कर का सच छूपाया जा रहा है
आरजी कर अस्पताल में प्रशिक्षु महिला डॉक्टर से दरिंदगी की घटना पर शंकराचार्य ने कहा कि इस मामले में न्याय होना चाहिए। मामले को दबाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए क्योंकि पोल एक दिन खुला ही जाती है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने पाए, इसका भी प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोषियों के बचाने के बजाये उन्हें सख्त सजा दिलाने की कोशिश सरकार को करना चाहिये।
पूरी हैं असली, नकल के लिये सकल और अकल की जरूरत
समुद्री पर्यटन शहर दीघा में जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर निर्मित हो रहे मंदिर पर शंकराचार्य ने कहा कि असली असली होता है और नकली नकली। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी भूल गयी है कि नकल के लिये अकल और सकल दोनों की जरूरत होती है। पूरी का मतलब ही जगरन्नाथ पूरी है दीघा का मंदिर नकली है।
मां गंगा के जयघोष से गूंज उठा सागर तट
कहावत है, सारे तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार...यह इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां पहुंचने का राह बहुत कठिन है। हलांकि, अब यह रास्ता पहले से काफी सुगम हो गया है। सागर के तट पर भव्य गंगा आरती का आयोजन किया गया जहाँ दर्जन भर पूरोहितों ने माँ गंगा के साथ साथ सागर देव की आरती उतारी। सागर तट पर आरती देख पुण्यार्थी भाव विभोर हो गये। हजारों लोगों ने इसमें हिस्सा लिया।