Please wait
पदभार संभालते ही एक्शन में शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहली समीक्षा बैठक Sudhir wins historic ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री बोले ‘मुझे देश की युवा शक्ति पर बहुत गर्व है’ Sudhir wins historic पीओके भारत का अभिन्न अंग, पाकिस्तान से वार्ता हुई तो सिर्फ यही मुद्दा उठाया जाएगाः राजनाथ सिंह Sudhir wins historic पुरुलिया : रंगदारी वसूलने के आरोप में तृणमूल छात्र परिषद के जिलाध्यक्ष गिरफ्तार Sudhir wins historic पत्रकार हमला प्रकरण में मुख्यमंत्री का सख्त संदेश, गुंडा दमन कानून से कार्रवाई Sudhir wins historic एक करोड़ मुआवजा, केस वापस होंगे; प्रधान के इस्तीफे के साथ ही CJP का आंदोलन खत्म Sudhir wins historic छात्रों के आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा Sudhir wins historic हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में पहाड़ी से गिरी चट्टान की चपेट में आई टाटा सुमो, 13 लोगों की मौत, दो घायल Sudhir wins historic सरकार के साथ वार्ता के बाद सीजेपी बोली- प्रधान के इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं Sudhir wins historic सरकार के लिखित आश्वासन पर 26 दिनों बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन Sudhir wins historic

सोमनाथ मंदिर हमारी सभ्यता का अटूट संकल्पः मोदी

उन्होंने इसे भारत की सभ्यता और आस्था की महानता का प्रतीक बताया और उन विभूतियों एवं वीरों को नमन किया जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी सोमनाथ की रक्षा की और उसकी शान को पुनर्जीवित किया।

08 May 2026

सोमनाथ मंदिर हमारी सभ्यता का अटूट संकल्पः मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 11 मई को उन्हें एक बार फिर वहां जाने का सौभाग्य मिलेगा। उन्होंने इसे भारत की सभ्यता और आस्था की महानता का प्रतीक बताया और उन विभूतियों एवं वीरों को नमन किया जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी सोमनाथ की रक्षा की और उसकी शान को पुनर्जीवित किया।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में सोमनाथ पर लिखे अपने लेख को साझा करते हुए कहा कि यह अवसर हमें स्मरण कराता है कि इस पावन स्थल की रक्षा और इसके पुनर्निर्माण के लिए देश की कई पीढ़ियों ने निरंतर संघर्ष किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता का अटूट संकल्प है। समुद्र की लहरें हमें यह सिखाती हैं कि चाहे कितने भी तूफान क्यों न हों, मनुष्य का साहस और आत्मबल हर बार फिर से उठ खड़ा होने में सक्षम है। प्रभास की परिक्रमा पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है और यहां आने वाले श्रद्धालु उस सभ्यता की अद्भुत निरंतरता का अनुभव करते हैं, जिसकी ज्योति कभी बुझाई नहीं जा सकी।

प्रधानमंत्री ने उन असंख्य विभूतियों का स्मरण किया जिन्होंने आक्रमणों के बीच भी सोमनाथ की रक्षा की। प्रधानमंत्री ने लकुलीश और सोम शर्मा जैसे मनीषियों से लेकर महाराज धारसेन चतुर्थ, भीम प्रथम, जयपाल, आनंदपाल, राजा भोज, कर्णदेव सोलंकी, जयसिंह सिद्धराज, कुमारपाल सोलंकी, भाव बृहस्पति, पाशुपताचार्य, विशालदेव वाघेला, त्रिपुरांतक, महिपाल चूड़ासमा, राव खंगार चूड़ासमा और पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर सहित अनेक नामों का जिक्र करते हुए कहा कि इन सबने कठिन समय में भी भक्ति और परंपरा को जीवित रखा। उन्होंने वीर हमीरजी गोहिल और वीर वेगड़ाजी भील जैसे पराक्रमियों को भी नमन किया।

प्रधानमंत्री ने अपने लेख में महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सरदार बल्लभ भाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि 13 नवंबर 1947 को सरदार पटेल ने सोमनाथ के जर्जर अवशेषों के सामने समुद्र का जल हाथ में लेकर यह प्रतिज्ञा की थी कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण होगा। दुर्भाग्यवश वह इस सपने को साकार होते नहीं देख सके, लेकिन उनके विजन को केएम मुंशी ने आगे बढ़ाया और 1951 में मंदिर का पुनर्निर्माण पूरा हुआ। राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उद्घाटन समारोह में भाग लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया, जबकि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने इसका विरोध किया था।

उन्होंने कहा कि उन्हें अक्टूबर 2001 का वह समय याद है जब मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने दायित्व संभाला था। उसी वर्ष सरदार पटेल की जयंती पर सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 50वीं वर्षगांठ का आयोजन हुआ था जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी भी उपस्थित थे। उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के उस ऐतिहासिक भाषण का उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि सोमनाथ मंदिर दुनिया को यह संदेश देता है कि श्रद्धा और विश्वास को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक से देश ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र पर चल रहा है। सोमनाथ से काशी, कामाख्या से केदारनाथ, अयोध्या से उज्जैन और त्रयंबकेश्वर से श्रीशैलम तक, सभी आध्यात्मिक केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना और सशक्त हुई है।

प्रधानमंत्री ने बलिदान देने वाले वीरों और दानवीरों की स्मृति में अगले एक हजार दिनों तक विशेष पूजा आयोजित करने की घोषणा का उल्लेख करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोग इस पुनीत कार्य में योगदान दे रहे हैं। सोमनाथ हमें याद दिलाता है कि जब कोई समाज अपनी आस्था, संस्कृति और एकता से जुड़ा रहता है, तब उसे लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता।

प्रधानमंत्री ने सभी देशवासियों से अपील की कि इस पावन अवसर पर सोमनाथ धाम की यात्रा करें और इसकी भव्यता का साक्षात दर्शन करें। वहां खड़े होकर लोग केवल भक्ति का अनुभव नहीं करेंगे, बल्कि उस सभ्यतागत चेतना की धड़कन भी सुनेंगे जो कभी रुकी नहीं और जिसने हर आघात के बावजूद अपनी पहचान और संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखा। सोमनाथ भारत की अपराजित आत्मा का प्रतीक है और इसकी शक्ति सदियों से राष्ट्र को प्रेरित करती रही है।

Comments

No comments to show. Log in to add some!

Other Relevant Stories


सोमनाथ मंदिर हमारी सभ्यता का अटूट संकल्पः मोदी
उन्होंने इसे भारत की सभ्यता और आस्था की महानता का प्रतीक बताया और उन विभूतियों एवं वीरों को नमन किया जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी सोमनाथ की रक्षा की और उ





Download The Taaza Tv App Now to Stay Updated on the Latest News!


play store download
app store download
app img


Breaking News