राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों को मिले कठोर दंडः संघ
जिस कोख से जन्म लिया, उसी का लहू बहाया
हावड़ा। जगतबल्लभपुर के माजू-मारघुराली इलाके में बोरे में बंद मिली 55 वर्षीय सुषमा देड़े की लाश के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। कल तक जो बेटा और बहू अपनी बेगुनाही का ढोंग रच रहे थे, पुलिस की कड़ी पूछताछ के सामने उनकी पत्थरदिली टूट गई। बेटे और बहू ने यह स्वीकार कर लिया है कि अपनी ही जन्मदात्री और सास की हत्या उन्होंने मिलकर की थी। इस कबूलनामे के बाद पूरे इलाके में आक्रोश और घृणा का माहौल है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली कड़ी वही बोरा साबित हुआ, जिसका जिक्र स्थानीय लोगों ने किया था। आरोपी बेटे ने स्वीकार किया कि उसने अपनी मोटरसाइकिल ढंकने वाले उसी बोरे का इस्तेमाल अपनी माँ के शव को ठिकाने लगाने के लिए किया। यह तथ्य केवल एक अपराधी की मानसिकता को नहीं, बल्कि एक बेटे की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को दर्शाता है। जिस माँ ने उसे अपनी गोद में पालकर बड़ा किया, उसे एक वस्तु की तरह बोरे में भरकर बांध के किनारे फेंक आना, मानवीय संवेदनाओं की हत्या है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, घर के भीतर लंबे समय से चल रहा संपत्ति या आपसी विवाद इस कदर बढ़ गया था कि बेटे और बहू ने अपनी उम्रदराज माँ को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली। बुधवार शाम जब सुषमा लापता हुईं, तब किसी को अंदाजा नहीं था कि उनके अपने ही घर के चिराग ने उनकी जिंदगी का दीया बुझा दिया है।
आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए हत्या के तरीके और साक्ष्यों को छुपाने की पूरी कहानी पुलिस को बताई है। जगतबल्लभपुर की यह घटना कानून के लिए अब एक सुलझा हुआ केस हो सकती है, लेकिन समाज के लिए यह एक ऐसा घाव है जो लंबे समय तक टीस देता रहेगा। वह सन्नाटा जो सुषमा की मौत के बाद गांव में पसरा था, अब एक चीख में बदल गया है वह चीख जो पूछ रही है कि आखिर रिश्तों में इतनी कड़वाहट कहाँ से आई कि एक बेटा अपनी ही माँ का जल्लाद बन गया?
पुलिस ने अब दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश करने की तैयारी शुरू कर दी है। कानून भले ही उन्हें सजा सुना दे, लेकिन अपनी माँ के वजूद को बोरे में बंद करने वाले इन गुनहगारों को समाज की अदालत कभी माफ नहीं कर पाएगी।