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संसदीय नियमों के अनुसार, नोटिस की वैधता जांच के बाद कम से कम 14 दिनों के बाद इसे सदन में चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। हालांकि, प्रस्ताव को पारित होने के लिए लोकसभा की कुल सदस्यता का बहुमत चाहिए, जिसकी विपक्ष के पास संभावना कम है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा सचिवालय को विपक्ष की ओर से उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस की जांच करने और प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन ने नियम 94(सी) के तहत यह नोटिस सौंपा है, जिसमें स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार, राहुल गांधी को बोलने से रोकने और विपक्षी सांसदों के निलंबन का आरोप लगाया गया है। इस नोटिस पर 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर हैं। संसदीय नियमों के अनुसार, नोटिस की वैधता जांच के बाद कम से कम 14 दिनों के बाद इसे सदन में चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। हालांकि, प्रस्ताव को पारित होने के लिए लोकसभा की कुल सदस्यता का बहुमत चाहिए, जिसकी विपक्ष के पास संभावना कम है।
लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने विपक्ष का नोटिस मिलने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि इस पर विचार किया जाएगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। निचले सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सांसद मोहम्मद जावेद व अन्य ने लोकसभा महासचिव को यह नोटिस सौंपा। नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के 100 से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
बीते 2 फरवरी को राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़ा विषय उठाने की अनुमति नहीं मिलने, सदन की अवमानना के मामले में 8 विपक्षी सांसदों को निलंबित किए जाने व अन्य मुद्दों पर सदन में गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष के लोगों को कुछ भी बोलने की छूट दी गई है।