टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित
सुदीप ने तंज कसते हुए कहा कि जिस दल के पास जितनी संख्या है, सदन में उसे उसी के अनुरूप मान-सम्मान और स्थान मिलना चाहिए
कोलकाता। संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक के बाद नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) ने तृणमूल कांग्रेस के कालीघाट गुट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एनसीपीआई के लोकसभा नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने साफ तौर पर कहा कि उनके सांसदों की संख्या अब मूल तृणमूल से काफी अधिक हो चुकी है। इसलिए, लोकसभा में बैठने की व्यवस्था भी इसी संख्या बल के आधार पर तय होनी चाहिए और उनकी पार्टी को सदन की पहली पंक्ति (फ्रंट रो) में स्थान मिलना चाहिए।
सुदीप बंद्योपाध्याय ने तृणमूल पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि संसदीय लोकतंत्र में छोटी पार्टियों को पहली पंक्ति में जगह नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने गणित समझाते हुए कहा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने कुल 29 सीटें जीती थीं, लेकिन एक सांसद के असामयिक निधन और 20 सांसदों के बगावत कर एनसीपीआई में शामिल हो जाने के बाद अब कालीघाट गुट के पास केवल आठ सांसद ही बचे हैं। वहीं दूसरी तरफ, एनसीपीआई के पास 20 सांसदों का मजबूत नेतृत्व है। सुदीप ने तंज कसते हुए कहा कि जिस दल के पास जितनी संख्या है, सदन में उसे उसी के अनुरूप मान-सम्मान और स्थान मिलना चाहिए।
एनसीपीआई ने सर्वदलीय बैठक के दौरान तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा किए गए प्रतीकात्मक वॉकआउट पर भी तीखा कटाक्ष किया। सुदीप ने कहा कि उन्होंने अपने दशकों लंबे राजनीतिक जीवन में आज तक किसी भी दल को सर्वदलीय बैठक जैसी महत्वपूर्ण चर्चा से वॉकआउट करते हुए नहीं देखा है। इसके साथ ही एनसीपीआई की मुख्य सचेतक काकली घोष दस्तिदार ने भी इस व्यवहार को अनुचित बताते हुए कहा कि देश के निर्माण के लिए रचनात्मक चर्चा आवश्यक है, न कि बैठकों का बहिष्कार या वॉकआउट करना।
एनसीपीआई ने आगामी सत्र के लिए अपनी रणनीतिक दिशा भी पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह संसद में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन करेगी। सुदीप बंद्योपाध्याय ने दावा किया कि 20 सांसदों के साथ एनसीपीआई अब लोकसभा में एनडीए के भीतर तेलुगु देशम पार्टी (16 सांसद) और जनता दल यूनाइटेड (12 सांसद) से भी बड़ी सहयोगी बनकर उभरी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि उनके 20 सांसदों के समूह में तीन मुस्लिम और आठ महिला सांसद शामिल हैं, जो समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने इस पूरी प्रक्रिया की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं। महुआ का तर्क है कि जब लोकसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर अभी भी तृणमूल के 28 सांसद दर्ज हैं और स्पीकर ने एनसीपीआई को अलग दल के रूप में मान्यता नहीं दी है, तो उन्हें बैठक में क्यों बुलाया गया। इस पर सुदीप ने दोटूक कहा कि अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को करना है और संसद शुरू होते ही सबको पता चल जाएगा कि किसे कहां जगह मिली है।
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सरकार का रुख साफ करते हुए कहा कि एनसीपीआई सांसदों की अलग बैठने की मांग के कारण उन्हें बैठक में आमंत्रित करना सरकार की जिम्मेदारी थी।