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मोथाबाड़ी कांड पर सुप्रीम कोर्ट की एनआईए को फटकार

साजिश के पीछे कौन सा झंडा? महज खानापूर्ति नहीं, अब चाहिए ठोस ऐक्शन

13 Apr 2026

मोथाबाड़ी कांड पर सुप्रीम कोर्ट की एनआईए को फटकार

कोलकाता। मालदा जिले के मोथाबाड़ी में हुई हिंसा और चुनाव अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना ने अब देश की सबसे बड़ी अदालत के गलियारे में हलचल मचा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एनआईए पर सवालों की बौछार कर दी है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख इतना सख्त था कि उसने साफ लफ्जों में चेतावनी दी कि जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सिमट कर नहीं रहनी चाहिए। अदालत ने सीधे तौर पर इस कांड के पीछे छिपे राजनीतिक चेहरों को बेनकाब करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने एनआईए से सबसे चुभता हुआ सवाल यह किया कि क्या गिरफ्तार किए गए आरोपियों के तार किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं? 
अदालत की यह टिप्पणी उस वक्त आई जब जांच एजेंसी ने अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश की। एनआईए ने कोर्ट को सूचित किया कि अब तक की जांच में मुख्य साजिशकर्ता समेत तीन लोगों को दबोचा जा चुका है, जिनमें इंडियन सेक्युलर फ्रंट का एक नेता और कांग्रेस के दो पदाधिकारी शामिल हैं। हालांकि, कोर्ट इस जानकारी से संतुष्ट नजर नहीं आया और उसने जांच की गहराई पर जोर देते हुए पूछा कि क्या यह किसी सोची-समझी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। यह पूरा विवाद मालदा के कालियाचक-2 ब्लॉक में मतदाता सूची संशोधन के दौरान शुरू हुआ था। वोटर लिस्ट से नाम कटने के विरोध में उग्र भीड़ ने कालियाचक-2 ब्लॉक कार्यालय को घेर लिया था और सात सरकारी अधिकारियों को घंटों तक बंधक बनाकर रखा था। इस घटना ने न केवल चुनाव आयोग की तैयारियों पर सवाल उठाए, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था की पोल भी खोल दी थी। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही इस मामले में तेजी आई और अब कोलकाता की विशेष सीबीआई अदालत में कुल 12 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगी। 
न्यायाधीशों ने कहा कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता सर्वोपरि है। ऐसे में केवल कुछ गिरफ्तारियां काफी नहीं हैं, बल्कि उन शक्तियों का पता लगाना जरूरी है जो पर्दे के पीछे से इस बवाल को हवा दे रही थीं। 
मोथाबाड़ी कांड अब केवल एक स्थानीय झड़प नहीं, बल्कि बंगाल चुनाव से पहले राजनीतिक शुचिता की परीक्षा बन गया है। अब पूरी नजर इस पर है कि एनआईए की अगली रिपोर्ट में किन और बड़े नामों का खुलासा होता है।

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