धर्मतल्ला के आंदोलन में 'बाहरी तत्वों' की घुसपैठ पर उठे गंभीर सवाल
कोलकाता। कोलकाता, 24 जुलाई। नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में पनपे भ्रष्टाचार के खिलाफ शुक्रवार को कोलकाता की सड़कें उस समय रणक्षेत्र में बदल गईं, जब धर्मतला इलाके में छात्रों का विरोध प्रदर्शन अचानक बेहद उग्र हो गया। शाम के व्यस्त समय में निकली इस विशाल रैली को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा, तो वहीं दूसरी ओर से पुलिस बल को निशाना बनाकर पानी की बोतलें, जूते और पत्थर फेंके गए। इस भयानक अफरा-तफरी के बीच आंदोलनकारी छात्रों ने दावा किया कि असामाजिक तत्वों ने छात्र बनकर जुलूस में घुसपैठ की और जानबूझकर शांतिपूर्ण मार्च को हिंसक बनाकर बदनाम करने की साजिश रची।
प्रदर्शन के दौरान कई ऐसे नजारे देखने को मिले जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता को हैरान कर दिया। जुलूस में केवल आम छात्र ही नहीं, बल्कि छोटे-छोटे बच्चे, टोपी धारी बुजुर्ग और बुर्के में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल दिखाई दीं। इस अप्रत्याशित भीड़ को देखकर यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोग कहाँ से आए और क्या छात्रों के इस आंदोलन के पीछे किसी बाहरी साए का हाथ था? प्रदर्शनकारियों के बीच से पुलिस विरोधी नारे लगाए गए और माहौल तब और संवेदनशील हो गया जब रैली में नारा-ए-तकबीर, अल्लाह हू अकबर, इनकलाब और अलिया विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा आजादी के नारे गूँजने लगे।
हद तो तब हो गई जब उग्र भीड़ ने घटना की ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे मीडियाकर्मियों को भी खुलेआम अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया। आज तक, न्यूज़ 18 बांग्ला समेत कई प्रमुख समाचार चैनलों के पत्रकारों और डिजिटल पोर्टल के संवाददाताओं को निशाना बनाया गया। उग्र प्रदर्शनकारियों ने पत्रकारों को गोदी मीडिया कहकर उनके साथ बदसलूकी की, हाथापाई की और उनके काम में बाधा पहुँचाई। इन गंभीर हमलों, जहरीले नारों और अचानक भड़की हिंसा ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि पुलिस और मीडिया पर हमला आखिर किसके इशारे पर किया गया था।
दिन की शुरुआत से ही सियालदह स्टेशन से हजारों की संख्या में लोग धर्मतला की ओर बढऩे लगे थे। आठ प्रमुख वामपंथी छात्र संगठनों, कांग्रेस की छात्र इकाई छात्र परिषद और कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले निकले इस प्रदर्शन में अलिया विश्वविद्यालय के छात्रों की भारी मौजूदगी रही। हालाँकि, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ चेतावनी दी है कि आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाने, कानून-व्यवस्था हाथ में लेने या राष्ट्रविरोधी माहौल बनाने की कोशिशों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उपद्रवियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया है कि वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम हैं, जबकि सोनम वांगचुक ने दो मांगों पर सहमति बनने के बाद अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है। फिलहाल शनिवार दोपहर तक सरकार के जवाब का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही आंदोलन की आगे की रूपरेखा तय होगी।