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संसद में 'ऑपरेशन लोटस' की आहट से मची खलबली

दीदी के दूत बनकर अचानक दिल्ली पहुंचे अभिषेक

06 Jun 2026

संसद में 'ऑपरेशन लोटस' की आहट से मची खलबली

कोलकाता। संसदीय गलियारों में ऑपरेशन लोटस की बढ़ती गूंज और तृणमूल के भीतर बड़े पैमाने पर असंतोष की खबरों के बीच देश की सियासत गरमा गई है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विशेष निर्देश पर अचानक दिल्ली पहुंच चुके हैं। इस औचक दौरे ने देश की राजधानी से लेकर कोलकाता के कालीघाट तक राजनीतिक हलचल को चरम पर पहुंचा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसदीय दल में किसी भी संभावित बगावत की आग को शांत करने और सांसदों को एकजुट रखने के लिए खुद अभिषेक बनर्जी ने कमान संभाल ली है। 
पार्टी के भीतर से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल के भीतर एक बड़ा धड़ा अलग गुट बनाने की फिराक में है। कयास लगाए जा रहे हैं कि लगभग 18 से 19 सांसद मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं। गणित के लिहाज से देखें तो वर्तमान में तृणमूल के पास कुल 28 लोकसभा सांसद हैं। ऐसे में कड़े दलबदल विरोधी कानून के हंटर से बचने और अपनी सदस्यता सुरक्षित रखने के लिए बागी गुट को दो-तिहाई यानी कम से कम 19 सांसदों के जादुई आंकड़े की जरूरत होगी। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा जोरों पर है कि इस नए संभावित गुट की कमान वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार के हाथों में सौंपी जा सकती है, हालांकि इस संबंध में अब तक कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। 
अभिषेक बनर्जी का यह दिल्ली दौरा इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण और रहस्यमयी माना जा रहा है क्योंकि 8 जून को विपक्षी गठबंधन इंडिया की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में ममता बनर्जी और अभिषेक दोनों को शामिल होना था, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से पहले ही अभिषेक का दिल्ली लैंड करना साफ संकेत देता है कि परदे के पीछे संकट गहरा है। इसके अलावा, एक और पेंच राज्य की जांच एजेंसी सीआईडी को लेकर भी फंसा हुआ है। हस्ताक्षर जालसाजी के एक पुराने मामले में सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को 8 जून को ही पूछताछ के लिए तलब किया है। अभिषेक ने पहले ही स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर वक्त मांगा था, जिसे एजेंसी ने खारिज कर दिया। अब देखना दिलचस्प होगा कि 8 जून की यह तारीख तृणमूल कांग्रेस के लिए केवल बैठकों का दौर साबित होती है या फिर दिल्ली के मंच पर बंगाल की सियासत का कोई नया अध्याय लिखा जाता है।

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