'वापसी अब मुमकिन नहीं, वह अध्याय हमेशा के लिए खत्म'
कोलकाता। विधानसभा के बजट सत्र में उस वक्त सियासी सरगर्मियां सातवें आसमान पर पहुंच गईं, जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विपक्षी तृणमूल और उसकी सर्वोच्च नेता ममता बनर्जी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने कड़े राजनीतिक संघर्षों के दिनों को याद किया और स्पष्ट शब्दों में एलान कर दिया कि राज्य में अब तृणमूल कांग्रेस की सत्ता में वापसी किसी भी कीमत पर संभव नहीं है; वह अध्याय हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त हो चुका है और प्रदेश की जनता अपना अंतिम फैसला सुना चुकी है।
सीएम शुभेंदु ने सदन में विपक्षी बेंचों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि जब वे खुद विपक्ष में थे, तब तत्कालीन सरकार द्वारा उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का बेरहमी से दमन किया जाता था। उन्होंने एक वाकये का जिक्र करते हुए कहा कि हाल ही में ममता बनर्जी कोलकाता के रानी रश्मोनी रोड पर एक धरना कार्यक्रम आयोजित करना चाहती थीं। इस संबंध में जब पुलिस के आला अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से राय मांगी, तो उन्होंने तुरंत बिना किसी हिचकिचाहट के धरने की अनुमति देने के निर्देश जारी किए। शुभेंदु ने कहा कि उनकी सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और आंदोलन करने के अधिकार का सम्मान करती है, लेकिन तृणमूल को यह समझ लेना चाहिए कि जनता अब उन्हें पूरी तरह खारिज कर चुकी है।
अपने राजनीतिक सफर की परतों को खोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे वर्ष 2011 के उस ऐतिहासिक परिवर्तन आंदोलन का भी अहम हिस्सा थे जिसने वाममोर्चे को उखाड़ा था, और साल 2026 में राज्य को तृणमूल के कुशासन से मुक्ति दिलाने के लिए भी उन्होंने सड़कों पर उतरकर आखिरी दम तक संघर्ष किया। उन्होंने वर्तमान तृणमूल नेतृत्व पर करारा कटाक्ष करते हुए कहा कि जिन सच्चे और निष्ठावान नेताओं ने कभी वामपंथ के खिलाफ खून-पसीना बहाया था, उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया है; अब उस दल का चरित्र और दिशा पूरी तरह बदल चुकी है।
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार के दौरान अपने ऊपर हुए राजनीतिक प्रतिशोध का ब्योरा देते हुए बताया कि उन पर कुल 102 झूठे मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनका जिक्र आज भी उनके चुनावी हलफनामों में दर्ज है। उन्हें कई बार विधानसभा से नियम-विरुद्ध तरीके से निलंबित किया गया, लगभग एक साल तक सदन की कार्यवाही से दूर रखा गया और उनकी हर राजनीतिक गतिविधि पर पहरा बिठाने की कोशिश की गई। शुभेंदु ने कहा कि उन्हें जिलों में जनसभाएं करने से रोकने के लिए प्रशासनिक मशीनरी झोंक दी गई थी, जिसके खिलाफ न्याय पाने के लिए उन्हें 100 से भी अधिक बार हाईकोर्ट की चौखट पर जाना पड़ा था।
उन्होंने दावों के साथ कहा कि उनकी नई सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने या राजनीतिक बदले की भावना से काम करने में रत्ती भर भी विश्वास नहीं रखती। पूर्ववर्ती सरकार को घेरते हुए मुख्यमंत्री ने गंभीर आरोप लगाया कि पिछले शासनकाल में विभिन्न संस्थाओं और विभागों को बड़ी मात्रा में सरकारी धन रेवडिय़ों की तरह बांटा गया था, जिसकी गहन जांच कराई जा रही है और इसका पूरा हिसाब-किताब बहुत जल्द प्रदेश की जनता के सामने लाया जाएगा। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे हार की कुंठा से बाहर निकलकर राज्यहित के मुद्दों पर रचनात्मक सहयोग दें, क्योंकि उनकी सरकार 'सबका साथ, सबका विकासÓ के मूल मंत्र के साथ पश्चिम बंगाल को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से एक नए और मजबूत दौर में ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।