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नीत थापा और बिनय पर कसेगा शिकंजा
कोलकाता। बंगाल की सत्ता बदलने के बाद अब उत्तर बंगाल और पहाड़ों की सियासत में बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। उत्तर बंगाल के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दार्जिलिंग और पहाड़ी क्षेत्रों के विकास के लिए गठित गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) में हुए कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े और निर्णायक अभियान का बिगुल फूंक दिया है। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में जीटीए के पुराने कामकाज की जांच कराने और बंद पड़ी फाइलों को दोबारा खोलने का एलान कर दिया है, जिसके बाद से ही राज्य के राजनीतिक हलकों में जबरदस्त हलचल मच गई है।
सिलीगुड़ी में उत्तर बंगाल के विकास कार्यों की समीक्षा के लिए आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि जीटीए में पिछले वर्षों के दौरान किस तरह काम हुआ, धरातल पर कितना काम वास्तव में पूरा हुआ और विकास परियोजनाओं के नाम पर आवंटित किए गए करोड़ों रुपये का फंड कहां और कितना खर्च हुआ, अब इन सब की परत-दर-परत विस्तृत समीक्षा की जाएगी। गौरतलब है कि भाजपा लंबे समय से यह आरोप लगाती रही है कि पूर्ववर्ती तृणमूल शासन के दौरान जीटीए में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और घोटाले हुए, जिन्हें तत्कालीन सत्ता के रसूख तले दबा दिया गया था। अब सूबे में नई सरकार के गठन के बाद उन तमाम संदिग्ध फाइलों की नए सिरे से स्क्रूटनी शुरू होने जा रही है।
मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख से पहले ही उत्तर बंगाल विकास मंत्री निशीथ प्रामाणिक ने प्रशासनिक मुख्यालय उत्तरकन्या का दौरा कर कई विकास परियोजनाओं में भारी गड़बड़ी और धांधली का खुलासा किया था। मंत्री ने साफ कहा था कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में कई बड़ी परियोजनाएं सिर्फ सरकारी कागजों में ही पूरी दिखाई गईं, जबकि जमीन पर उनका कोई वजूद ही नहीं था। इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने गड़बड़ी में शामिल कुछ ठेकेदार कंपनियों को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश भी जारी किए थे। सचिवालय सूत्रों के मुताबिक, अब विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए विभागीय मंत्री हर सप्ताह खुद उत्तरकन्या में बैठकर सीधे कामकाज और सरकारी फाइलों की कड़ी निगरानी करेंगे।
भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का दावा करने वाली भाजपा सरकार का सीधा निशाना तृणमूल शासन के दौरान जीटीए की कमान संभालने वाले अनीत थापा और बिनय तमांग जैसे कद्दावर पहाड़ी नेताओं के कार्यकाल पर है। भाजपा का सीधा आरोप है कि इन नेताओं के दौर में विकास के नाम पर आए करोड़ों रुपये का बंदरबांट हुआ और जनता की भलाई के बजाय सिर्फ राजनीतिक प्रचार और निजी हितों को तरजीह दी गई। सिलीगुड़ी की इस अहम बैठक के बाद क्षेत्र के सांसद राजू बिष्ट और विधायक शंकर घोष ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि जीटीए में हुए आकंठ भ्रष्टाचार के सारे सुबूत मुख्यमंत्री के सामने पेश किए जाएंगे ताकि पहाड़ के वास्तविक विकास का रास्ता साफ हो सके।
दूसरी तरफ, पहाड़ों के कद्दावर नेता विमल गुरुंग ने भी जीटीए में हुए भाई-भतीजावाद और घोटालों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। गुरुंग ने इसके खिलाफ जीटीए मुख्यालय 'लालकुठी' के घेराव का बिगुल फूंका था, हालांकि मौजूदा पर्यटन सीजन और सैलानियों की भारी आमद को देखते हुए उन्होंने फिलहाल अपने इस आंदोलन को कुछ समय के लिए टाल दिया है।