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सुप्रीम कोर्ट के हंटर के बाद जागी सरकार

चिंगड़ीघाटा मेट्रो को 72 घंटे में हरी झंडी, 15 मई से फिर गूंजेगी मशीनें

02 Apr 2026

सुप्रीम कोर्ट के हंटर के बाद जागी सरकार

कोलकाता। विकास की राह में रोड़ा बनी प्रशासनिक सुस्ती पर जब देश की सर्वोच्च अदालत का हंटर चला, तो उसका असर महज 72 घंटों में दिखाई देने लगा है। लंबे समय से अधर में लटके चिंगड़ीघाटा मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए कोलकाता पुलिस ने आखिरकार निर्माण कार्य की अनुमति दे दी है। 
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार और सख्त लहजे के बाद हरकत में आए प्रशासन ने 15 मई से ट्रैफिक ब्लॉक कर काम दोबारा शुरू करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। यह फैसला शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली ऑरेंज लाइन के विस्तार के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगा। इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें 23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में हुई उस सुनवाई में हैं, जहाँ मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल मनुभाई पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए थे। अदालत ने दोटूक शब्दों में कहा था कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को राजनीतिक फुटबॉल नहीं बनाया जा सकता। 
कोर्ट ने राज्य सरकार को उसकी संवैधानिक जिम्मेदारियों की याद दिलाते हुए कोलकाता हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें पुलिस और ट्रैफिक विभाग को तुरंत अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया गया था। अदालत की इस तल्खी का ही परिणाम है कि महीनों से अटकी फाइलें चंद घंटों में दौडऩे लगीं। 
रेल विकास निगम लिमिटेड के सूत्रों के मुताबिक, निर्माण कार्य का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा महज 316 वर्गमीटर जमीन और ट्रैफिक प्रबंधन की अनुमति न मिलने के कारण अटका था। अब नई योजना के तहत 15 मई से चिंगड़ीघाटा के व्यस्त इलाके में योजनाबद्ध तरीके से ट्रैफिक ब्लॉक लिया जाएगा।  
एजेंसी की रणनीति है कि मानसून की पहली बारिश से पहले इस महत्वपूर्ण और अधूरे हिस्से के निर्माण को गति देकर पूरा कर लिया जाए। इसके लिए हर तीन से चार दिन के अंतराल पर ट्रैफिक पुलिस के साथ समन्वय बिठाकर काम को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि ईएम बाइपास पर वाहनों की आवाजाही भी कम से कम प्रभावित हो। 
गौरतलब है कि न्यू गडिय़ा से कोलकाता एयरपोर्ट तक की इस मेट्रो परियोजना में अब केवल 366 मीटर का हिस्सा जुडऩा शेष है। इस छोटे से पैच के पूरा होते ही सॉल्ट लेक, राजारहाट और न्यू टाउन जैसे इलाकों की कनेक्टिविटी पूरी तरह बदल जाएगी। 
स्थानीय निवासियों और दफ्तर जाने वालों के लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं है, क्योंकि चिंगड़ीघाटा क्रॉसिंग लंबे समय से शहर के सबसे बड़े ट्रैफिक बॉटलनैक के रूप में कुख्यात रही है। सुप्रीम कोर्ट की इस सक्रियता और उसके बाद प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनहित की परियोजनाओं में देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब जबकि कानूनी और प्रशासनिक बाधाएं दूर हो चुकी हैं, कोलकाता के नागरिकों को उम्मीद है कि न्यू गडिय़ा से एयरपोर्ट तक सीधी मेट्रो दौडऩे का सपना जल्द ही हकीकत में तब्दील होगा। यह घटनाक्रम न केवल एक प्रोजेक्ट की जीत है, बल्कि न्यायिक हस्तक्षेप से मिलने वाले प्रशासनिक सुधार का एक बड़ा उदाहरण भी है।

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