वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए रकम जब्त कर ली और उसे साउथ पोर्ट थाने में जमा करा दिया
कोलकाता। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति का असर सड़कों पर दिखने लगा है। शनिवार, 11 अप्रैल को कोलकाता के विभिन्न प्रवेश द्वारों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस और फ्लाइंग स्क्वॉड टीम ने सघन नाका चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान उचित दस्तावेज न होने के कारण तीन अलग-अलग घटनाओं में कुल 11 लाख 28 हजार रुपये की नकदी जब्त की गई। शनिवार तड़के करीब 5 बजे, मृण्मय मृधा के नेतृत्व में एफएसटी टीम ने स्विंग ब्रिज के पास नाकेबंदी कर रखी थी।
इस दौरान झारखंड निवासी नीरज कुमार गुप्ता की तलाशी लेने पर उनके पास से 2,18,000 रुपये नकद मिले। पूछताछ के दौरान वे इस बड़ी रकम के स्रोत और उद्देश्य से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए रकम जब्त कर ली और उसे साउथ पोर्ट थाने में जमा करा दिया। दूसरी बड़ी कार्रवाई डायमंड हार्बर रोड पर जोका ट्राम डिपो के पास हुई। स्टेटिक सर्विलांस टीम ने एक सफेद रंग की अर्टिगा कार को रोका, जिसमें 5 लोग सवार थे। कार की तलाशी लेने पर एक बैग के अंदर से 500-500 रुपये के 10 बंडल (कुल 5,00,000 रुपये) बरामद हुए। वैध कागजात के अभाव में ठाकुरपुकुर पुलिस ने न केवल नकदी और बैग, बल्कि वाहन को भी जब्त कर लिया। हालांकि, पुलिस ने उन्हें बेहाला पूर्व के रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष दस्तावेज पेश करने का निर्देश देकर छोड़ दिया है। तीसरी कार्रवाई नेचर पार्क के पास तारातला और संतोषपुर रोड क्रॉसिंग पर की गई। यहाँ एफएसटी की टीम ने एक ऊबर कार को रोककर तलाशी ली। कार में सवार यात्री सचिन साबू (झारखंड निवासी) के पास से 4,10,000 रुपये नकद मिले। साबू ने खुद को रेडीमेड गारमेंट व्यवसायी बताते हुए कहा कि वे व्यापार के सिलसिले में संतोषपुर मार्केट जा रहे थे, लेकिन मौके पर वे नकदी से जुड़ा कोई भी कानूनी प्रमाण नहीं दिखा सके। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए पूरी रकम जब्त कर ली। चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करते हुए कोलकाता पुलिस ने शहर के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि बिना वैध दस्तावेजों के बड़ी मात्रा में नकदी ले जाने पर पाबंदी है ताकि चुनावों में धनबल के अवैध प्रयोग को रोका जा सके। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने स्पष्ट कर दिया है कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।