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डिजिटल जाल में फंसेंगे कातिल

अब टॉवर डंपिंग का सहारा, संदिग्ध नंबरों की छंटनी शुरू

10 May 2026

डिजिटल जाल में फंसेंगे कातिल

कोलकाता। चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच कर रही विशेष जांच दल ने अब अपराधियों तक पहुँचने के लिए अभेद्य तकनीकी घेराबंदी शुरू कर दी है। पारंपरिक सुरागों के साथ-साथ पुलिस अब टॉवर डंपिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रही है, ताकि वारदात के समय घटनास्थल के आसपास मौजूद हर एक मोबाइल गतिविधि का कच्चा चि_ा खोला जा सके। पुलिस का मानना है कि हत्यारों ने आपसी तालमेल बिठाने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल जरूर किया होगा और यही डिजिटल फुटप्रिंट उन्हें सलाखों के पीछे पहुँचाएगा। 
जांच एजेंसियां घटनास्थल के आसपास लगे मोबाइल टावरों से भारी मात्रा में डेटा (डंप) इक_ा कर रही हैं। इसके विश्लेषण के लिए आधुनिक सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है, जो नियमित कॉल करने वाले स्थानीय लोगों के नंबरों को हटाकर उन संदिग्ध नंबरों को अलग कर रहा है, जो वारदात के समय अचानक सक्रिय हुए। पुलिस विशेष रूप से उन नंबरों की पहचान कर रही है जिनसे घटना के ठीक पहले या बाद में असामान्य संपर्क किया गया। 
पुलिस को पुख्ता अंदेशा है कि इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड को अंजाम देने के लिए पेशेवर बाहरी शूटरों का इस्तेमाल किया गया है, जिन्हें लॉजिस्टिक सपोर्ट स्थानीय गिरोहों ने मुहैया कराया। टॉवर लोकेशन डेटा के जरिए संदिग्धों के मूवमेंट को ट्रैक किया जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि रेकी के दौरान किन नंबरों की मौजूदगी बार-बार देखी गई थी। जांच अधिकारी इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि किन स्थानीय अपराधियों ने शूटरों को भागने के रास्ते और ठिकाने उपलब्ध कराए। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मोबाइल टावरों से मिले डेटा की तुलना सीसीटीवी फुटेज और टोल प्लाजा पर मिले डिजिटल ट्रांजैक्शन से कर रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि टॉवर डंपिंग से मिलने वाले संदिग्ध नंबरों और यूपीआई भुगतान से जुड़े मोबाइल नंबरों के बीच की कड़ी मिलते ही कातिलों का चेहरा साफ हो जाएगा। फिलहाल, डिजिटल साक्ष्यों को कडिय़ों की तरह जोड़ा जा रहा है और अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही पूरी साजिश का पर्दाफाश होगा।

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