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पोस्टमार्टम में छिपा है अभया के मौत का रहस्य, अनसुलझी गुत्थी सुलझा पायेगी सीबीआई!

चिकित्सक के बाद अब डोम से भी पूछताछ

25 Sep 2024

पोस्टमार्टम में छिपा है अभया के मौत का रहस्य, अनसुलझी गुत्थी सुलझा पायेगी सीबीआई!

कोलकाता। आरजी कर कांड को लेकर गहराये रहस्य से पर्दा उठाने के लिये सीबीआई मैराथन पूछताछ का दौर चला रही हैं। सीबीआई के समक्ष शव के पोस्टमार्टम को लेकर कई सवाल हैं जिसका जवाब तलाशने के लिये ना केवल पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक बल्कि दो डोम से भी बुधवार को पूछताछ की गयी। मंगलवार सुबह चौथी दफा की पूछताछ के लिये पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर अपूर्बा बिस्वास सीबीआई दफ्तर में पेश हुईं। उनके साथ आरजी कर अस्पताल के दो डोम भी नजर आए। सीबीआई उनसे घंटों पूछताछ की। 
पूछताछ को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या सीबीआई पूछताछ कर इस मामले के रहस्य को भेद पायेगी? जांच अधिकारी किसी भी संदेह से इनकार नहीं कर रहे हैं। तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 9 अगस्त को अभया का पोस्टमार्टम किया था। इसीलिए सीबीआई डॉक्टर अपूर्वा बिस्वास से पूछताछ कर रही है। इसके अलावा बोर्ड के अन्य दो सदस्यों रीना दास और मौली बनर्जी से भी केंद्रीय अधिकारियों ने पूछताछ की। लेकिन मंगलवार देखा गया कि अपूर्वा बिस्वास के साथ मुर्दाघर के दो सहायक जिन्हें डोम कहा जाता हैं उनसे भी पूछताछ की गयी। 
नतीजतन, सवाल उठता है कि क्या पोस्टमार्टम प्रक्रिया में कोई त्रुटि थी? जो पूरी जांच प्रक्रिया को भटका रहा है? संयोग से, जांच की कमान संभालने के बाद सबसे पहले सीबीआई ने प्रक्रियात्मक खामियों का जिक्र किया। सीबीआई ने शीर्ष अदालत में यह भी उल्लेख किया कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया शाम को क्यों की गई, और यह भी टिप्पणी की कि पत्राचार में त्रुटियां थीं। उन्होंने एक बड़ी साजिश का भी जिक्र किया है। लेकिन कैसी साजिश? कौन से सबूत खो गए हैं? खबर है कि अभी तक उनके मकसद तक नहीं पहुंचा जा सका है। दो डॉक्टर और डोम के बयानों से पता चलता है कि पोस्टमार्टम के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में त्रुटियां हुईं। 
सूत्रों के अनुसार, पोस्टमॉर्टम जांच की वीडियोग्राफी के मानक पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांचकर्ताओं का दावा है कि वीडियोग्राफी में मृतका के शरीर पर चोट के निशान स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं। इससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि यह त्रुटि अनजाने में हुई या जानबूझकर? अगर यह जानबूझकर हुई है, तो इसके पीछे का कारण क्या हो सकता है? नौ अगस्त को सूर्यास्त के बाद सिर्फ एक घंटे और दस मिनट के भीतर शव का पोस्टमॉर्टम और अवलोकन किया गया। 
रिपोर्ट के अनुसार, शाम 6 बजे से 7.10 के बीच पोस्टमार्टम जांच पूरी की गई। पोस्टमॉर्टम जांच के दिन कुल आठ शवों का पोस्टमॉर्टम हुआ, जिनमें से सात सूर्यास्त से पहले किए गए थे, लेकिन पीडि़ता का पोस्टमॉर्टम सूर्यास्त के बाद किया गया था। सूत्रों के अनुसार अस्पताल के एक डॉक्टर ने सीबीआई को दिए बयान में कहा है कि उन्होंने अंधेरे में जल्दबाजी में पोस्टमार्टम करने का विरोध किया था, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। कम रोशनी में पोस्टमॉर्टम जांच किए जाने के कारण कई महत्वपूर्ण अवलोकन अधूरे रह गए। 
सीबीआई सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान डॉक्टरों के साथ डोम भी मृत शरीर पर चोटों के निशान की पहचान करते हैं और उनका रिकॉर्ड तैयार करते हैं। लेकिन इस मामले में डोम से हुई पूछताछ में भी कई चूकें सामने आई हैं। मृत शरीर की सिलाई और अन्य प्रक्रियाओं को लेकर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका है। मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि सेमिनार हॉल में फॉरेंसिक नमूने लेने में भी गड़बड़ी पाई गई है। पोस्टमॉर्टम जांच रिपोर्ट की बारीकी से जांच में भी संदिग्ध परिस्थितियों का पता चला है। शव को सही तरीके से संरक्षित न करने को लेकर भी सवाल उठे हैं। 
अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि उस दिन मर्चरी में जगह नहीं थी, लेकिन जांचकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के गंभीर मामले में यह कोई उचित कारण नहीं हो सकता। डॉ। अपूर्व विश्वास, जो पोस्टमॉर्टम जांच के प्रभारी थे, से अब तक 28 घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ हो चुकी है। मंगलवार को उन्हें फिर से बुलाया गया था और जरूरत पडऩे पर दोबारा पूछताछ की जाएगी।

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