बंगाल के रण में हुमायूं की हुंकार, 153 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी
कोलकाता। विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच पूर्व मंत्री हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी ने अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी कर राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। रविवार दोपहर पार्टी अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में 153 प्रत्याशियों के नामों का आधिकारिक ऐलान किया। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह इस बार राज्य की कुल 182 सीटों पर चुनाव लडऩे की तैयारी में है। गठबंधन की तमाम अटकलों के बीच स्वतंत्र रूप से जारी की गई यह सूची हुमायूं कबीर की सोलो स्ट्रैटेजी (स्वतंत्र रणनीति) की ओर इशारा कर रही है। पार्टी ने राज्य की दो सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों नंदीग्राम और भवानीपुर पर भी अपने उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का संकेत दिया है। नंदीग्राम से शाहिदुल हक को टिकट दिया गया है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर से पुनम बेगम को मैदान में उतारा गया है। खुद हुमायूं कबीर अपने गृह जिले मुर्शिदाबाद की दो सीटों रेजिनगर और नवदा से चुनाव लड़ेंगे। दिलचस्प बात यह है कि मुर्शिदाबाद की कुल 22 सीटों में से फिलहाल केवल 10 पर ही नाम तय किए गए हैं, जिससे राजनीतिक विश्लेषक बाकी सीटों पर गठबंधन की संभावनाओं को लेकर कयास लगा रहे हैं। उम्मीदवारों के चयन में भी पार्टी ने कई चर्चित चेहरों पर दांव खेला है। रानीनगर सीट से यासिर हैदर को प्रत्याशी बनाया गया है, जो राज्य के कद्दावर मंत्री फिरहाद हाकिम के पूर्व दामाद बताए जाते हैं।
वहीं, भरतपुर सीट से पीरजादा ख्वाएब अमीन को चुनावी मैदान में उतारा गया है। इस्लामपुर सीट को लेकर सस्पेंस अब भी बरकरार है। माना जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस से टिकट न मिलने के कारण नाराज चल रहे अब्दुल करीम चौधरी के लिए यह सीट खाली छोड़ी गई है, जिनके जल्द ही हुमायूं कबीर के साथ आने की चर्चा है। हुमायूं कबीर ने स्पष्ट किया कि बाकी उम्मीदवारों की घोषणा आगामी 25 मार्च को कोलकाता से की जाएगी, जबकि पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र 28 मार्च को सार्वजनिक होगा। जानकारी के अनुसार, आम जनता उन्नयन पार्टी के एजेंडे में स्वास्थ्य सेवाएं, बढ़ती महंगाई, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दे प्रमुख होंगे। बिना किसी बड़े गठबंधन के चुनावी मैदान में उतरी हुमायूं कबीर की यह पार्टी कई सीटों पर सत्ताधारी दल और प्रमुख विपक्ष के समीकरण बिगाडऩे की ताकत रखती है, जिसने बंगाल के चुनावी मुकाबले को और अधिक रोमांचक बना दिया है।