एम्बुलेंस में बैठ इंतजार करती रही वृद्धा
कोलकाता। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत सुनवाई का सिलसिला रविवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। राज्य भर में बनाए गए 3,234 सुनवाई केंद्रों के बाहर सुबह से ही लोगों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं। चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पहले चरण में उन मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया है, जिनका नाम 2002 की मतदाता सूची से किसी तरह से स्थापित नहीं हो पाया है। हावड़ा जिले के संकराइल ब्लॉक कार्यालय में भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया। पोलियो से पीडि़त 75 वर्षीय सबिता मन्ना एम्बुलेंस में बैठकर अपनी बारी का इंतजार करती नजर आईं। मतदाता सूची में अपने नाम को लेकर असमंजस और अनिश्चितता उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी। उनके भतीजे तापस मन्ना ने बताया कि सबिता मन्ना की कोई संतान नहीं है और वे 2002 की मतदाता सूची में अपना नाम नहीं ढूंढ पाईं। बचपन में पोलियो होने के कारण वे ठीक से चलने-फिरने में असमर्थ हैं।
तापस ने कहा कि पहले मतदान कर्मी और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि घर आकर उनसे मिलते थे और उन्हें सिर्फ मतदान के दिन ही बूथ तक आना पड़ता था। लेकिन इस बार शिविर में खुद पहुंचना अनिवार्य कर दिया गया है। एम्बुलेंस के भीतर बैठी सबिता मन्ना ने कहा कि इस उम्र में फिर से नागरिकता साबित करनी पड़े, तो बहुत दुख होता है। उत्तर 24 परगना जिले के बारासात के काजीपारा इलाके से आई महिला मतदाता निरूफा खातून भी गहरी चिंता में नजर आईं। 2002 की मतदाता सूची में अपने पिता के मतदान का कोई प्रमाण प्रस्तुत न कर पाने के कारण उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया है।
अपने पति के साथ शिविर पहुंची निरूफा ने कहा कि मैं कमरहटी में जन्मी एक भारतीय नागरिक हूं। शादी के बाद बारासात आ गई। मेरे पिता का निधन हो चुका है और उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है। मेरी मां का देहांत भी मेरे बचपन में ही हो गया था। हालांकि मतदाता सूची अधिकारी ने भरोसा दिया है कि सुनवाई के बाद समस्या का समाधान हो जाएगा, फिर भी मन में डर है। निरूफा के पति ने बताया कि वे स्कूल छोडऩे का प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड और मौजूदा मतदाता पहचान पत्र सहित सभी जरूरी दस्तावेज साथ लेकर आए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि पर्यवेक्षक इन दस्तावेजों को स्वीकार करेंगे और समस्या का समाधान होगा। बर्दमान जिले के बरनीलपुर इलाके के शिविर में एक और मार्मिक मामला सामने आया। 26 वर्षीय महिला अपनी तीन वर्षीय बेटी के साथ सुनवाई में शामिल नहीं हो सकीं। उनकी बेटी का इलाज मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में चल रहा है। महिला के ससुर ने पत्रकारों को बताया कि वे पोती के अस्पताल में भर्ती होने से जुड़े मेडिकल दस्तावेज डाक से लेकर आए हैं। उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि हमारे पास इलाज से जुड़े सभी कागजात हैं, अब देखना है कि पर्यवेक्षक क्या निर्णय लेते हैं।
गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग ने 16 दिसंबर को एसआईआर प्रक्रिया के बाद राज्य की मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की थी। इसमें मृत्यु, पलायन, जनगणना प्रपत्र जमा न करने सहित विभिन्न कारणों से 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसी के बाद से राज्यभर में सुनवाई शिविरों में भीड़ और चिंता का माहौल बना हुआ है। लगातार दूसरे दिन भी सामने आई भारी भीड़ और लोगों की परेशानियों ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की जमीनी चुनौतियों को उजागर कर दिया है।