विपक्ष के हंगामे के कारण संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित
मुख्यमंत्री के फैसले की विपक्षी खेमे ने भी की सराहना
कोलकाता। विधानसभा अब केवल बहसों का मंच नहीं रहेगी, बल्कि जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण का केंद्र बनेगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने लालफीताशाही पर करारा प्रहार करते हुए ऐतिहासिक घोषणा की है। इसके तहत विधायकों द्वारा सदन में उठाए जाने वाले जनसमस्याओं से जुड़े मुद्दे अब प्रशासनिक फाइलों में लंबित नहीं रहेंगे। सरकार ने तय किया है कि हर मांग पर निश्चित समयसीमा में कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सदन में इस व्यवस्था का ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उल्लेख सत्र में विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों को विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर सात दिनों के भीतर संबंधित विभागों को भेजा जाएगा। इसके बाद विभागों को अगले सात दिनों में की गई कार्रवाई की जानकारी विधानसभा या संबंधित विधायक को लिखित में देनी होगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि मांग पूरी की जा सकती है, तो तुरंत कदम उठाए जाएं। यदि काम संभव न हो तो विभाग को कारण दर्ज कराना होगा और देरी की स्थिति में संभावित समयसीमा बतानी होगी।
प्रशासनिक जवाबदेही के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय खुद इसकी निगरानी करेगा। विधानसभा सचिवालय इन मांगों की सूची सीएमओ को भेजेगा, जहाँ हर तीन महीने में अनुपालन रिपोर्ट बनेगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि विधानसभा जनसमस्याओं के समाधान का सर्वोच्च मंच है, इसलिए समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है। सदन में इस पहल की विपक्षी खेमे ने भी सराहना की। तृणमूल विधायक फिरहाद हाकिम ने इसे विधानसभा के इतिहास में एक नया अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को ऐसा सम्मान देने और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था पहले कभी नहीं देखी गई। उन्होंने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।