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सीईओ दफ्तर के बाहर फिर भिड़े टीएमसी-बीजेपी समर्थक

अदालत ने किसी भी आपत्ति को 7 अप्रैल तक सुलझाने का निर्देश दिया है

02 Apr 2026

सीईओ दफ्तर के बाहर फिर भिड़े टीएमसी-बीजेपी समर्थक

कोलकाता। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची में नाम जोडऩे की प्रक्रिया रणक्षेत्र में तब्दील हो गई है। फॉर्म-6 को लेकर चल रहा विवाद गुरुवार को एक बार फिर हिंसक मोड़ ले चुका है। कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर तृणमूल के कार्यकर्ताओं और बूथ लेवल अधिकारियों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद इलाके को छावनी में बदल दिया गया है। 
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय बलों की अतिरिक्त टुकडिय़ों को तैनात किया गया है। इस पूरे बवाल के केंद्र में फॉर्म-6 का वह आवेदन है, जिसका उपयोग नए मतदाता अपना नाम जोडऩे के लिए करते हैं। 
तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी सुनियोजित तरीके से बाहरी लोगों के नाम बंगाल की मतदाता सूची में दर्ज कराने की कोशिश कर रही है। टीएमसी नेतृत्व का दावा है कि एक ही दिन में लगभग 30,000 आवेदन जमा किए गए, जिसे ममता बनर्जी ने वोटर हाईजैकिंग का नाम दिया है। 
पार्टी के जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी ने सीधे तौर पर निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर इस जनसांख्यिकीय बदलाव की कोशिश पर रोक लगाने की मांग की है। गुरुवार को तनाव तब और बढ़ गया जब टीएमसी समर्थकों ने दावा किया कि उन्होंने कुछ लोगों को भारी मात्रा में (कथित तौर पर 400 से अधिक) फॉर्म-6 के साथ सीईओ कार्यालय में घुसते पकड़ा। इसके बाद टीएमसी और बीजेपी समर्थक आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते नारेबाजी धक्का-मुक्की और झड़प में बदल गई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। 
सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल ने इस विवाद से खुद को दूर रखते हुए स्पष्ट किया है कि कार्यालय में कौन फॉर्म जमा कर रहा है, इसकी निगरानी करना उनका प्राथमिक कार्य नहीं है, बल्कि चुनाव संपन्न कराना है। इस मामले ने अब कानूनी रूप भी ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट में इस विवाद पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने मौखिक टिप्पणी की थी कि चुनाव से पहले फॉर्म-6 का बड़ी संख्या में जमा होना कोई असामान्य बात नहीं है और इस पर आपत्ति दर्ज कराने की एक निर्धारित प्रक्रिया है। अदालत ने किसी भी आपत्ति को 7 अप्रैल तक सुलझाने का निर्देश दिया है। 
वहीं, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि नामांकन की तारीखों तक है, और किसी भी फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कड़ी जांच की जाएगी। फिलहाल सीईओ कार्यालय के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई है और धारा 144 जैसा माहौल बना हुआ है। टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि वे इस साजिश के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखेंगे। दूसरी ओर, बीजेपी ने इन आरोपों को आधारहीन बताते हुए कहा है कि तृणमूल हार के डर से नए मतदाताओं के पंजीकरण को रोकने की कोशिश कर रही है। इस सियासी घमासान ने पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल को बेहद संवेदनशील बना दिया है, जहाँ अब एक-एक नए मतदाता का पंजीकरण राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई बन गया है। 

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