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देश में बंगाल दूसरा माओवादी मुक्त राज्य: राजीव कुमार
कोलकाता। 15 फरवरी 2010 को शिल्दा में माओवादी हमले में 24 ईएफआर सैनिक मारे गये थे। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी शहीदों को याद करने का मुख्य समारोह शिलदार स्ट्राको कैंप में आयोजित किया गया। महानिदेशक राजीव कुमार सहित पुलिस अधिकारियों ने शिविर परिसर में स्थित शहीद स्मृति उद्यान में 24 महोगनी वृक्षों को पानी पिलाया और पुष्पांजलि अर्पित की। 2011 में ईएफआर जवानों की याद में नए स्ट्रैको कैंप के अंदर शहीद उद्यान में 24 महोगनी के पेड़ लगाए गए थे। इस दिन क्षेत्र के जरूरतमंद बुजुर्गों को कपड़े वितरित किए गये। मौके पर राजीव कुमार ने कहा कि आंध्र के बाद बंगाल दूसरा माओवादी मुक्त राज्य है।
पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार निबार शिल्दा घटना की 15वीं बरसी पर शिल्दा पहुंचे। उन्होंने शिल्डा स्थित स्ट्राको शिविर के अंदर शहीद वेदी पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने 24 सैनिकों की उनके अलावा पश्चिम बंगाल पुलिस के एडीजी (कानून व्यवस्था) जावेद शमीम, एडीजी (सीआईएफ) अजय नंदा, एडीजी (पश्चिमी क्षेत्र) अशोक कुमार प्रसाद, आईजी (बांकुरा रेंज) शीशराम झाझरिया, आईजी (सीआईएफ) सब्यसाची रमन मिश्रा, डीआईजी (ईएफआर) स्वप्न सरकार, झाडग़्राम के जिलाधिकारी सुनील अग्रवाल, झाडग़्राम के पुलिस अधीक्षक अरिजीत सिन्हा, झाडग़्राम जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वहां मौजूद थे।
कार्यक्रम में डीजी राजीव कुमार ने कहा कि हम देश के दूसरे राज्य हैं जहां हम माओवादियों को मुक्त कराने में सफल रहे हैं। जहां पहले आंध्र प्रदेश को बनने में 10 से 12 वर्ष लगे थे, वहीं हम सात से आठ वर्षों में ही माओवादियों से मुक्त हो गए। हमारे कई लोगों ने इसके लिए बलिदान दिया है। यहां 88 साथियों का बलिदान हुआ। आज पश्चिम बंगाल पुलिस के लिए काला दिन है। यह हमारे लिए गहरे दुख का दिन है और हमारी प्रतिज्ञा का दिन है। उन्होंने समाज की रक्षा के लिए बलिदान दिया है, लेकिन हम उनके आदर्शों पर काम कर सकते हैं और शांति और व्यवस्था बनाए रख सकते हैं। जब यह घटना घटी और उसके बाद हम यहां आए, यहां के लोगों ने जिस तरह से हमारी मदद की, उसी के कारण हम इस क्षेत्र को माओवादियों से मुक्त करा पाए।
उन्होंने कहा कि न केवल पश्चिम बंगाल पुलिस बल्कि क्षेत्र के लोग भी इसके लिए बधाई के पात्र हैं। इसके बाद महानिदेशक मंच के पास बैठे शहीद ईएफआर जवानों के परिजनों के पास गए और हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम किया। फिर, जैसे ही वह मंच पर पहुंचे, उन्होंने अपनी टोपी उतार दी और वहीं खड़े हो गए। डीजी ने यहां तक जानना चाहा कि शहीद जवानों के परिजनों को मंच के नीचे बैठाने की व्यवस्था क्यों की गई है। इसके बाद वह मंच से नीचे आए और क्षेत्र के जरूरतमंद बुजुर्गों को नए कपड़े बांटे।
स्टाको कैंप से निकलते समय डीजी राजीव कुमार ने कहा कि शिल्दा की घटना को हम एक दिन के लिए भी नहीं भूल सकते। कई मामलों में तो जान की कुर्बानी देनी पड़ती है। जो एक पुलिस अधिकारी के लिए सर्वोच्च बलिदान है। जीवन देने से बड़ा कुछ भी नहीं है। इसलिए हम इस शिविर में 15 वर्ष पहले हुई एक घटना में शहीद हुए 24 वीर जवानों को याद करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। साथ ही, मैं सभी परिवारजनों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूँ।
पश्चिम बंगाल पुलिस उन सभी परिवारों के साथ थी, है और रहेगी। जिन लोगों ने अपनी जान दे दी, वे शायद वापस न आएं। लेकिन उन 24 लोगों के बलिदान के बदले में हम माओवादियों को राज्य से बाहर खदेडऩे में सफल रहे। यह हमारी जीत है और यह आज उन 24 शहीदों की वजह से संभव हुई है।