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कालीगंज विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल ने आलीफा अहमद को दिया टिकट

वहीं विपक्ष इन मुद्दों के जरिए ममता सरकार को लगातार घेरता दिखाई दे रहा है

27 May 2025

कालीगंज विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल ने आलीफा अहमद को दिया टिकट

कोलकाता। चुनाव आयोग ने 25 मई को चार राज्यों की 5 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनावों की तारीखों का ऐलान किया। अलग-अलग राज्यों की जिन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है, इसमें पश्चिम बंगाल की कालीगंज विधानसभा सीट भी शामिल है। ये सीट टीएमसी विधायक नसीरुद्दीन अहमद के निधन के बाद खाली हो गई थी। अब इसी सीट के लिए 19 जून को मतदान होना है। तृणमूल ने इस विधानसभा सीट के लिए अलीफा अहमद को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस बीच राजनीतिक हल्कों में ये चर्चा आम हो गई है कि मुर्शिदाबाद की हिंसा के बाद जनता तृणमूल पर कितना भरोसा कर पाएगी? 
इस उपचुनाव को लेकर टीएमसी के आधिकारिक एक्स हैंडल से एक पोस्ट सामने आया है, इसमें लिखा है कि एआईटीसी, चेयरपर्सन ममता बनर्जी की प्रेरणा और मार्गदर्शन में आगामी बंगाल विधानसभा उपचुनाव के लिए 19 जून, 2025 को होने वाले चुनाव हेतु हमारे उम्मीदवार की घोषणा करते हुए हमें प्रसन्नता हो रही है। यानी इस उपचुनाव को लेकर तृणमूल फुल कान्फिडेंस में नजर आ रही है। कालीगंज का यह उपचुनाव पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि वक्फ संशोधन अधिनियम और इसे लेकर हुए तनाव के बाद ये बाई-इलेक्शन कहीं न कहीं ममता सरकार की प्री-टेस्टिंग साबित हो सकता है। केंद्र के वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इन्ही प्रदर्शनों के दौरान मुर्शिदाबाद में हिंसक घटनांए सामने आईं, जिसकी जांच के लिए हाईकोर्ट ने एक समिति गठित की थी। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश की है, जिसमें बताया गया है कि बेटबोना गांव में करीब 113 घरों को लूटा और जलाया गया। 
रिपोर्ट में कहा गया कि हिंसा के दौरान अधिकांश ग्रामीणों ने मालदा में शरण ली थी, लेकिन उन्हें पुलिस नें जबरन वापस गांव भेजा। रिपोर्ट में कुछ आरोप बेहद गंभीर हैं जिसमें स्थानीय पार्षद और पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़ा होना लाजमी है। 
इसमें कहा गया है कि मुर्शिदाबाद में हिंसा स्थानीय पार्षद के इशारे पर की गई थी और स्थानीय पुलिस नें इसे रोंकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। इसके चलते सैकड़ों लोग पलायन करनें को मजबूर हुए थे अब ग्रामीणों ने अपनी सुरक्षा के लिए स्थायी बीएसएफ कैंप बनाने की मांग की है। इन घटनाओं के बाद कालीगंज का उपचुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। टीएमसी जहां अपनी पकड़ मजबूत रखने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष इन मुद्दों के जरिए ममता सरकार को लगातार घेरता दिखाई दे रहा है। 

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