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मतदाता सूची विवाद को लेकर निर्वाचन आयोग के खिलाफ मुखर हुए तृणमूल विधायक हुमायूं कबीर

उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग के इस रवैये के खिलाफ उनका संघर्ष जारी रहेगा

31 Jan 2026

मतदाता सूची विवाद को लेकर निर्वाचन आयोग के खिलाफ मुखर हुए तृणमूल विधायक हुमायूं कबीर

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले की डेबरा विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस विधायक और पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हुमायूं कबीर ने भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी जताई है। मतदाता सूची सत्यापन के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद आयोग को वे ‘रोहिंग्या’ प्रतीत हो रहे हैं।
हुमायूं कबीर कोलकाता के कसबा क्षेत्र के निवासी हैं। शुक्रवार को कसबा विधानसभा अंतर्गत रूबी पार्क स्थित एक विद्यालय में उनकी सुनवाई निर्धारित थी। वर्ष 2002 की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज नहीं था, जबकि परिवार के अन्य सदस्यों के नाम सूची में मौजूद थे। इसी विसंगति को लेकर निर्वाचन आयोग की ओर से उन्हें साक्ष्यों के साथ उपस्थित होने का नोटिस भेजा गया था।
सुनवाई के लिए रवाना होने से पहले पूर्व आईपीएस अधिकारी ने सामाजिक माध्यम पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने लिखा कि उन्हें निर्वाचन आयोग से नोटिस प्राप्त हुआ है, लेकिन उनके मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड और पासपोर्ट भी आयोग के लिए पर्याप्त नहीं माने गए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में वे भारत सरकार के निर्देश पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनियुक्ति पर यूरोप में कार्यरत थे, जिसके चलते उस समय उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं हो सका। उनके पास उस अवधि के राजनयिक पासपोर्ट की प्रति भी उपलब्ध है।
मीडिया से बातचीत में विधायक ने कहा कि उन्होंने 31 वर्षों तक पुलिस सेवा में देश की सेवा की है। वर्ष 2001 में भारत सरकार ने ही उन्हें पूर्वी यूरोप प्रतिनियुक्ति पर भेजा था। वे वर्षों से मतदान करते आ रहे हैं और वर्तमान में स्वयं एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं, इसके बावजूद उन्हें इस तरह की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने इसे उत्पीड़न बताते हुए कहा कि शायद आयोग को वे रोहिंग्या लग रहे हैं।
हुमायूं कबीर ने बताया कि सुनवाई के दौरान उन्होंने अपने पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनकी छायाप्रति ली गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग के इस रवैये के खिलाफ उनका संघर्ष जारी रहेगा।
वहीं, भाजपा के घाटाल सांगठनिक जिला अध्यक्ष तन्मय दास ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया में सहयोग करे। विधायक को किन कारणों से बुलाया गया, यह संबंधित अधिकारी और वे स्वयं ही बेहतर ढंग से स्पष्ट कर सकते हैं।

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