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तृणमूल सांसद काकोली घोष ने सभी पदों से दिया इस्तीफा, पार्टी पर उठाए सवाल

सांसद ने स्पष्ट किया कि उनका फैसला किसी व्यक्तिगत नाराजगी या अभिमान का परिणाम नहीं है

27 May 2026

तृणमूल सांसद काकोली घोष ने सभी पदों से दिया इस्तीफा, पार्टी पर उठाए सवाल

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के बारासात से लाेकसभा में तृणमूल कांग्रेस सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। काकोली ने बुधवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बक्सी को पत्र लिखकर तृणमूल महिला कांग्रेस की चेयरपर्सन समेत सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया है।
इससे तीन दिन पहले ही उन्होंने जिला अध्यक्ष पद छोड़ दिया था। अपने पत्र में काकोली ने राज्य में सामने आए विभिन्न भ्रष्टाचार मामलों और आरजी कर प्रकरण को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने लिखा कि राशन घोटाला, शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार और कई प्रशासनिक अनियमितताओं ने आम लोगों के मन में भारी असंतोष और अविश्वास पैदा किया है।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की पूर्व छात्रा रहीं काकोली ने 2024 में महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मामले को दबाने के आरोपों ने समाज को झकझोर दिया और इसका व्यक्तिगत रूप से उन पर भी गहरा असर पड़ा। पत्र में उन्होंने बिना नाम लिए पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी पर भी निशाना साधा। काकोली ने लिखा कि जिस पद पर रहते हुए किसी महिला सांसद के प्रति एक “अशिक्षित और अभद्र” सांसद के अनुचित व्यवहार को रोका न जा सके और वरिष्ठ नेतृत्व से सहयोग या सहानुभूति न मिले, उस पद पर बने रहने का कोई अर्थ नहीं है।
उन्होंने पार्टी की चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक को लेकर भी सवाल उठाए। काकोली ने लिखा कि संगठन पर यदि किसी अपारदर्शी और अलोकतांत्रिक प्रभाव का दबदबा बढ़ता है, तो यह पार्टी की विचारधारा और परंपरा के लिए शुभ संकेत नहीं है।
सांसद ने स्पष्ट किया कि उनका फैसला किसी व्यक्तिगत नाराजगी या अभिमान का परिणाम नहीं है। उन्होंने कहा कि वह अब पार्टी की सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम करेंगी और लोकतंत्र तथा जनता के प्रति नैतिक जिम्मेदारी के कारण उन्होंने संगठनात्मक पदों से खुद को अलग किया है।
हाल ही में तृणमूल ने उन्हें संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाया था और यह जिम्मेदारी फिर से कल्याण बनर्जी को सौंप दी गई थी। इसके बाद काकोली ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा था कि 1976 से पहचान और 1984 से राजनीतिक सफर शुरू हुआ। चार दशक की निष्ठा का यही पुरस्कार मिला।
राजनीतिक हलकों में उस समय भी चर्चा तेज हो गई थी, जब मंगलवार को काकोली शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में शामिल हुई थीं। हालांकि उन्होंने कहा था कि प्रशासन सभी का होता है और वहां दलगत राजनीति नहीं देखी जानी चाहिए। वहीं, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि उनकी सरकार “विशेष सांसदों” को प्रशासनिक बैठकों में आमंत्रित करेगी और पूर्ववर्ती राजनीतिक संस्कृति को बदलेगी।

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