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उत्तर में ममता की हुंकार, दक्षिण में अभिषेक का प्रहार
कोलकाता। विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही सत्ताधारी तृणमूल ने विपक्षी खेमे को मात देने के लिए अपना सबसे बड़ा चुनावी ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। पार्टी ने इस बार उत्तर में ममता, दक्षिण में अभिषेक की दोहरी रणनीति पर दांव खेला है, जिससे पूरे राज्य को एक साथ मथने की तैयारी है। इस रणनीति के तहत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद उत्तर बंगाल की कमान संभालेंगी, जबकि दक्षिण बंगाल में जीत का मोर्चा पार्टी के सेनापति और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी संभालेंगे। अभियान की औपचारिक शुरुआत रविवार को ममता बनर्जी के अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर से होगी। चेतला के अहिंद्र मंच पर आयोजित होने वाली इस महत्वपूर्ण कार्यकर्ता सभा में कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम और स्थानीय पार्षदों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री न केवल अपने क्षेत्र के लिए, बल्कि राज्यभर के कार्यकर्ताओं के लिए जीत का मंत्र फूँकेंगी। माना जा रहा है कि इस सभा से ममता बनर्जी सीधे तौर पर विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ अपनी चुनावी रणनीति को धार देंगी। भवानीपुर से हुंकार भरने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अगला पड़ाव उत्तर बंगाल होगा। उनके प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, 25 मार्च को वह कूचबिहार और अलीपुरद्वार में विशाल जनसभाओं को संबोधित करेंगी, जबकि अगले दिन चालसा में उनके चुनाव प्रचार की योजना है। उत्तर बंगाल, जो पिछले चुनावों में पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है, वहां ममता बनर्जी की सक्रियता कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दूसरी ओर, दक्षिण बंगाल के गढ़ को अभेद्य बनाने की जिम्मेदारी अभिषेक बनर्जी के कंधों पर है। अभिषेक 24 मार्च से अपने अभियान का आगाज़ पाथरप्रतिमा से करेंगे। इसके तुरंत बाद, 25 मार्च को वह दासपुर, केशियाड़ी और नारायणगढ़ जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सभाएं कर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाएंगे। इस पूरे चुनावी कार्यक्रम का सबसे दिलचस्प और हाई-वोल्टेज हिस्सा नंदीग्राम में देखने को मिलेगा। दक्षिण बंगाल की अपनी सभाओं के बाद अभिषेक बनर्जी नंदीग्राम पहुंचेंगे, जहां वह पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ एक अहम रणनीतिक बैठक करेंगे। नंदीग्राम वही सीट है जहां से शुभेंदु अधिकारी एक बार फिर मैदान में हैं, जिससे इस क्षेत्र पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। तृणमूल की यह चरणबद्ध रणनीति साफ दर्शाती है कि पार्टी ने 2026 की लड़ाई के लिए अपने दोनों सबसे बड़े चेहरों को मोर्चे पर तैनात कर दिया है। रविवार की सभा से शुरू होने वाला यह चुनावी अभियान सोमवार से जिलों में और अधिक आक्रामक रूप ले लेगा, जिससे बंगाल का सियासी दंगल अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है।