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सेवाश्रय के मंच पर रुजिरा की दस्तक
कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजने में अब सौ दिन से भी कम का समय शेष है। सियासी बिसात बिछ चुकी है और शह-मात के इस खेल में तृणमूल ने अपना सबसे सरप्राइज कार्ड खेल दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी मंगलवार को अचानक सक्रिय राजनीति के गलियारे के मुहाने पर नजर आईं। मौका था डायमंड हार्बर में आयोजित सेवाश्रय स्वास्थ्य शिविर का, जहां उनकी मौजूदगी ने राज्य के सियासी तापमान को एकाएक बढ़ा दिया है। अब तक केवल कानूनी जांचों और पारिवारिक आयोजनों तक सीमित रहने वालीं रुजिरा बनर्जी का किसी सार्वजनिक सेवा प्रकल्प में शामिल होना साधारण घटना नहीं मानी जा रही है। डायमंड हार्बर के एसडीओ मैदान में चल रहे मॉडल सेवाश्रय कैंप में उन्होंने न केवल व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि इलाज कराने आए मरीजों से आत्मीय संवाद भी किया। तृणमूल के गलियारों में चर्चा है कि यह अभिषेक बनर्जी की उस सॉफ्ट पॉलिटिक्स का विस्तार है, जिसके जरिए पार्टी महिलाओं और मध्यम वर्ग के बीच एक मानवीय चेहरा पेश करना चाहती है। पार्टी नेतृत्व इस समय उत्साह में है। इसका कारण है विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के गढ़ नंदीग्राम में हालिया सहकारी समिति चुनावों में तृणमूल की बड़ी जीत। टीएमसी के रणनीतिकारों का मानना है कि नंदीग्राम में सेवाश्रय कैंपों के जरिए जो जनसंपर्क हुआ, उसी ने भाजपा के किले में सेंध लगाई है। पार्टी ने इस बार रैलियों के शोर के बजाय स्वास्थ्य सेवाओं के जरिए सीधे घर-घर पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही हैं। साथ ही भाजपा के संगठनात्मक प्रभाव को सेवा के जरिए काटना भी चुनावी रणनीति का ही एक हिस्सा हैं। डायमंड हार्बर से शुरू हुआ यह मॉडल अब पूरे बंगाल में चुनावी हथियार बनने को तैयार है।
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो रुजिरा बनर्जी की उपस्थिति के तीन बड़े निहितार्थ हो सकते हैं जिसमें सबसे पहला हैं बंगाल में दीदी के बाद परिवार की दूसरी महिला सदस्य को सामने लाकर महिला मतदाताओं को भावनात्मक संदेश देना। दूसरा अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद के बीच परिवार की सक्रियता को मजबूती प्रदान करना और परिवारवाद के आरोपों के बीच सेवा को ढाल बनाकर जनता के बीच जाना। तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सेवाश्रय केवल एक स्वास्थ्य शिविर नहीं, बल्कि जनता का विश्वास जीतने का एक माध्यम है। रुजिरा बनर्जी की उपस्थिति ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है।
भले ही रुजिरा बनर्जी ने कोई राजनीतिक भाषण न दिया हो, लेकिन उनकी तस्वीरों का सोशल मीडिया पर वायरल होना और कार्यकर्ताओं का हुजूम बहुत कुछ कह रहा है।