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इस पूरे विवाद की जड़ें कुछ दिनों पहले कुणाल घोष द्वारा दिए गए एक बयान से जुड़ी हैं
कोलकाता। विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्तारूढ़ तृणमूल के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान साफ तौर पर सतह पर आ गई। हाल के दिनों में हुई तीखी बयानबाजी के बाद पार्टी के फायरब्रांड प्रवक्ता कुणाल घोष और विधायक नयना बंद्योपाध्याय का गुरुवार को विधानसभा में आमना-सामना हुआ। दोनों नेता सदन में एक-दूसरे के बेहद करीब मौजूद थे, लेकिन उनके बीच की सियासी और व्यक्तिगत दूरी साफ तौर पर महसूस की जा रही थी। पूरे समय दोनों ने एक-दूसरे से पूरी तरह दूरी बनाए रखी और बातचीत तो दूर, नजरें मिलाना भी मुनासिब नहीं समझा। इस हाई-प्रोफाइल खामोशी ने विधानसभा परिसर में मौजूद अन्य नेताओं और मीडियाकर्मियों का ध्यान तुरंत अपनी ओर खींच लिया।
सदन के भीतर की स्थिति बेहद दिलचस्प और तनावपूर्ण थी। कुणाल घोष विधानसभा में जिस सीट पर बैठे थे, नयना बंद्योपाध्याय ठीक उनके पीछे वाली सीट पर आकर विराजमान हुईं। अमूमन एक ही खेमे के नेता ऐसे मौकों पर अनौपचारिक बातचीत करते दिखते हैं, लेकिन यहां माहौल बिल्कुल जुदा था। दोनों नेताओं ने पूरे समय एक-दूसरे की मौजूदगी को नजरअंदाज किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस रवैये ने साफ संकेत दे दिया है कि हाल ही में दोनों के बीच जो जुबानी जंग छिड़ी थी, उसका असर और कड़वाहट अभी भी पूरी तरह से कायम है।
इस पूरे विवाद की जड़ें कुछ दिनों पहले कुणाल घोष द्वारा दिए गए एक बयान से जुड़ी हैं। कुणाल घोष ने वरिष्ठ तृणमूल सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय पर निशाना साधते हुए उनकी पत्नी और विधायक नयना बंद्योपाध्याय पर भी तीखे व्यक्तिगत कटाक्ष किए थे। उन्होंने नयना को कथित तौर पर 'चलता-फिरता ब्यूटी पार्लर' कहने के साथ ही 'एक के साथ एक फ्री' जैसी विवादित टिप्पणी कर दी थी। इस पर पलटवार करते हुए नयना बंद्योपाध्याय ने भी कड़ा रुख अपनाया था और कहा था कि फ्री की चीजों का भी अपना एक आत्मसम्मान होता है। इसके बाद से ही दोनों नेताओं के समर्थक और राजनीतिक गलियारे इस विवाद को लेकर उबल रहे थे।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, नयना बंद्योपाध्याय इस बात से बेहद आहत और नाराज हैं कि पार्टी के एक जिम्मेदार चेहरे ने उनके खिलाफ सार्वजनिक मंच से ऐसी अभद्र भाषा का इस्तेमाल कैसे किया। हालांकि वह अपने पति सुदीप बंद्योपाध्याय के फैसलों को उनका व्यक्तिगत निर्णय मानती हैं और उससे असहमत भी हैं, लेकिन कुणाल घोष द्वारा मर्यादा लांघने को वह कतई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। चर्चा है कि नयना इस पूरे मामले को लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के रुख पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और वह जल्द ही इस पर की जाने वाली संभावित संगठनात्मक कार्रवाई के बारे में जवाब मांग सकती हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह भी सुगबुगाहट है कि यदि तृणमूल का शीर्ष नेतृत्व इस मामले में कुणाल घोष के खिलाफ कोई कड़ा कदम नहीं उठाता है, या नयना उनके रुख से संतुष्ट नहीं होती हैं, तो वह अपनी आगे की कड़क राजनीतिक रणनीति पर विचार कर सकती हैं। फिलहाल, मानसून सत्र के पहले ही दिन विधानसभा के भीतर दिखी इस तल्खी ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर सांगठनिक स्तर पर उभर रहे मतभेदों और अनुशासन के संकट को एक बार फिर से सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है।