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यह भव्य आयोजन, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर की शुरुआत से ही पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक अनिवार्य हिस्सा रहा है, को कोलकाता पुलिस से आवश्यक प्रशासनिक अनुमति नहीं मिल पाई है।
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा हर साल 21 जुलाई को कोलकाता के धर्मतला मैदान में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक 'शहीद दिवस' रैली इस वर्ष अधर में लटकती दिख रही है। यह भव्य आयोजन, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर की शुरुआत से ही पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक अनिवार्य हिस्सा रहा है, को कोलकाता पुलिस से आवश्यक प्रशासनिक अनुमति नहीं मिल पाई है।
सूत्रों के अनुसार, इतने बड़े जनसमूह के आयोजन के लिए सुरक्षा और यातायात प्रबंधन से संबंधित चिंताओं के कारण अनुमति देने में देरी हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में यह अनुमति न मिलना टीएमसी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। ममता बनर्जी स्वयं कांग्रेस में रहते हुए इस रैली की शुरुआत की थी, और तब से यह पार्टी की ताकत और जनाधार का प्रदर्शन करने का एक महत्वपूर्ण मंच रहा है।
इस रैली को लेकर अनिश्चितता ने टीएमसी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच बेचैनी बढ़ा दी है। पार्टी नेतृत्व अब वैकल्पिक स्थानों या अन्य समाधानों पर विचार कर रहा है, लेकिन 21 जुलाई की तारीख नजदीक आने के साथ ही दबाव बढ़ता जा रहा है। पश्चिम बंगाल में आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच 'शहीद दिवस' रैली का भविष्य अब भी स्पष्ट नहीं है, जिससे राज्य की राजनीति में गहमागहमी बनी हुई है।