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रोहन मित्रा को टिकट पर खूनी संघर्ष, कांग्रेस कार्यकर्ता का फटा सिर
कोलकाता। विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी होते ही कांग्रेस के भीतर का असंतोष ज्वालामुखी की तरह फट पड़ा है। बुधवार को कोलकाता के एंटाली स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय विधान भवन में टिकट बंटवारे को लेकर दो गुटों के बीच ऐसी हिंसक झड़प हुई कि पार्टी कार्यालय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। इस दौरान हुए पथराव और हाथापाई में शेख फिरोज नामक एक कांग्रेस कार्यकर्ता का सिर फट गया, जिससे फर्श पर खून बिखर गया। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि भारी पुलिस बल को मोर्चा संभालना पड़ा। हंगामे की मुख्य वजह बालीगंज विधानसभा सीट से दिवंगत दिग्गज नेता सोमेन मित्रा के पुत्र रोहन मित्रा को उम्मीदवार बनाया जाना है। सुबह से ही दक्षिण कोलकाता और अन्य जिलों से आए सैकड़ों कार्यकर्ता विधान भवन के बाहर जुटने लगे थे।
प्रदर्शनकारियों का सीधा आरोप है कि पार्टी नेतृत्व ने जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर पैसे लेकर बाहरी और अयोग्य लोगों को टिकट बेचे हैं। रोहन मित्रा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ताओं ने उन्हें पैराशूट कैंडिडेट करार दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान अजीबोगरीब स्थिति तब देखने को मिली जब कार्यकर्ता प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ दो फाड़ नजर आए। एक गुट ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए, जबकि अधीर रंजन चौधरी के समर्थन में जिंदाबाद की गूंज सुनाई दी।
बताया जा रहा है कि जब प्रदर्शनकारी कार्यालय के भीतर घुसने की कोशिश कर रहे थे, तभी अंदर मौजूद दूसरे गुट ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिससे मारपीट शुरू हो गई। पुलिस ने स्थिति को बिगड़ता देख विधान भवन का मुख्य द्वार बंद कर दिया और किसी तरह उपद्रवियों को वहां से खदेड़ा। इस हिंसक घटनाक्रम पर पर्दा डालते हुए कांग्रेस नेत्री मीता चक्रवर्ती ने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक और राष्ट्रीय पार्टी है, जहाँ टिकट को लेकर कार्यकर्ताओं की भावनाएं जुड़ी होती हैं। उन्होंने मारपीट की बात से इनकार करते हुए इसे मामूली धक्का-मुक्की बताया और आश्वासन दिया कि सभी विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझा लिया जाएगा।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर इस तरह का शक्ति प्रदर्शन और खूनखराबा पार्टी की छवि को भारी नुकसान पहुँचा सकता है। जहां एक तरफ पार्टी बाहरी चुनौतियों से लड़ रही है, वहीं 'अपनों' के बीच छिड़ी यह जंग चुनावी संभावनाओं पर सवालिया निशान खड़ा कर रही है।