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तृणमूल समर्थित इस संगठन ने प्रशासन को खुली चुनौती दी है
कोलकाता। राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर सोमवार को रणक्षेत्र जैसा नजारा देखने को मिला। 'बीएलओ अधिकार रक्षा समितिÓ के बैनर तले सैकड़ों बूथ लेवल अधिकारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई तीखी धक्का-मुक्की में एक पुलिस अधिकारी के घायल होने की खबर है, जिसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
प्रदर्शनकारी बीएलओ का मुख्य विरोध चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और बढ़ते डिजिटल बोझ को लेकर है। उनकी प्रमुख शिकायतें हैं कि ऐप में बार-बार आ रहे अपडेट और अतिरिक्त तकनीकी कार्यों के कारण काम का बोझ असहनीय हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब एसआईआर से संबंधित काम नहीं करेंगे। समिति का आरोप है कि बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद चुनाव आयोग उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा है। दोपहर के समय जब प्रदर्शनकारी सीईओ मनोज अग्रवाल से मिलने की मांग को लेकर दफ्तर की ओर बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें भारी बैरिकेडिंग कर रोक दिया। प्रदर्शनकारी बैरिकेड पर चढ़ गए और उसे धकेलने की कोशिश की। पुलिस की ओर से संयम बरतने की अपील की गई, लेकिन प्रदर्शनकारियों के अड़े रहने पर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। हालात को संभालने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और जबरन प्रदर्शनकारियों को हटाकर वैन में भरकर ले जाया गया। तृणमूल समर्थित इस संगठन ने प्रशासन को खुली चुनौती दी है।
समिति के नेताओं का कहना है कि यदि उनकी मांगें तुरंत नहीं मानी गईं, तो वे सीईओ दफ्तर के सामने 48 घंटे का अखंड धरना शुरू करेंगे। बता दें कि पिछले शनिवार को भी इस संगठन ने आयोग के दबाव के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था। फिलहाल सीईओ कार्यालय के चारों ओर सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया है। भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों के अडिय़ल रुख ने आगामी चुनावी तैयारियों पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।